‘उस दिन मैं मुंबई से लौटा था। बर्रा दो टंकी वाले टीटी पार्क के पास स्मैक लेने आया था। बारिश हो रही थी इसलिए स्मैक नहीं मिली।
मूड खराब था ऊपर से पानी में भीग रहा था (स्मैकियों को पानी से नफरत होती है) वह ‘चींटी’ (छोटा बच्चा) बीच रास्ते में साइकिल लेकर खड़ा था, मैंने कहा हटो तो बोला जल्दी है, रुके रहो, बस आव देखा न ताव, कमर से निकाली पिस्टल और चला दीं गोलियां। बच्चे का जिस्म छलनी हो गया।
इसके बाद बर्रा हाईवे होते हुए सनिगवां अपने घर चला गया।’ रोंगटे खड़े कर देने वाली यह बयानबाजी मो. शाह आलम की है जिसे रविवार को अकबरपुर में पकड़ा गया और फिर उसने बर्रा दो में मासूम किशोर हीरालाल की हत्या की वारदात सिलसिलेवार बताई। कैसे और क्यों मासूम हीरा को साइको किलर आलम ने, पढ़िए, अकबरपुर कोतवाली में आलम के इकबाल ए जुर्म की लाइव रिपोर्ट।
स्थान- अकबरपुर कोतवाली
समय- रविवार रात 1 बजकर 35 मिनट
सीओ गोविंदनगर विशाल पांडेय, एसओ बर्रा तुलसीराम और एसओ अकबरपुर अखिलेश यादव के बीच पीले रंग की बनियाइन और जींस पहने बैठे आलम से पुलिस का एक ही सवाल था, मासूम हीरालाल को क्यों मारा। चेहरे पर पागलों सी मुस्कुराहट लाते हुए आलम बोला, उस रात स्मैक न मिलने का गुस्सा था।
सिर भन्ना रहा था, उस पर बारिश के कारण कुछ सूझ नहीं रहा था। तभी रास्ते में वो चींटी (हीरालाल) आ गया। उस पर कितनी गोलियां चलाईं, मुझे खुद नहीं पता। घटना की रात अपने घर सनिगंवा जाकर पिस्टल को मिट्टी में दबा दिया था। पुलिस को बरामद पिस्टल में मिट्टी लगी हुई मिली है। इसके बाद दिल्ली भाग गया था। एक दिन पहले ही लौटा था और स्मैक की तलाश में भटक रहा था तभी अकबरपुर पुलिस के हाथ लग गया।
देहात की ओर भाग रहा था
पूछताछ के दौरान आलम बोला कि पुलिस और मीडिया उसके पीछे पड़ी हुई थी। ‘अमर उजाला’ में क्राइम सीन रिकंस्ट्रक्शन और सीसीटीवी कैमरे में फोटो कैद होने के बारे में पढ़ा तो डर गया। लगा कि पुलिस पीछे पड़ जाएगी। इसलिए रविवार को देहात की ओर भाग रहा था।
पिस्टल 2000 की
जिस पिस्टल की पांच गोलियां आलम ने हीरा के दुबले पतले शरीर पर उतार दीं, उस पिस्टल को हीरा ने कानपुर देहात से महज 2000 रुपये में खरीदा था। आलम के मुताबिक उसने पिस्टल जुएं की फड़ से खरीदी थी। वह टूटी हुई थी, बाद में उसे ठीक कराकर काम के लायक बनाया।
समय- रविवार रात दो बजकर 40 मिनट
हीरा ने बताई थी मोटी मूंछ
सीओ गोविंदनगर ने बताया कि हीरा ने मौत से पहले गोली मारने वाले के चेहरे पर मोटी मूंछ का जिक्र किया था। जब उन्हें रविवार रात आलम के पकड़े जाने का पता लगा तो उन्होंने अकबरपुर पुलिस से पहला सवाल यही पूछा कि क्या उसके मोटी मूंछ है। हां में जवाब मिलते ही वे देर रात अकबरपुर पहुंच गए।
भाई भी अपराध की दुनिया में
बर्रा पुलिस के मुताबिक आलम छह भाई और छह बहनें हैं, इनमें पांचवें नंबर का आलम है। इसके दो भाई जीशान और आफताब का चकेरी थाने में आपराधिक इतिहास है। पुलिस ने बताया कि आलम चकेरी के सेंट्रल स्कूल का छात्र रहा है। उसने ग्रेजुएशन किया है।
नई दिल्ली में लूटी थी वाइन शाप
पुलिस ने बताया कि दिल्ली के शातिर अपराधी वसीम बिल्ली और संजय सेठी के साथ मिलकर आलम ने वहां तीन साल पहले एक वाइन शाप में लूट की थी। बाद में सेठी और बिल्ली की हत्या हो गई। उनकी हत्या में भी आलम का नाम आया था। हांलाकि आलम का कहना है कि वह लूट में तो शामिल था लेकिन उन दोनों की हत्या से उसका कोई वास्ता नहीं है।
स्मैक और महिलाएं हैं कमजोरी
अकबरपुर कोतवाली में पुलिस के सामने आलम ने जो कुछ बोला, उससे पुलिस का अंदाजा है कि स्मैक और खूबसूरत लड़कियां उसकी कमजोरी और साइको होने की वजह हैं। आलम की प्रेमिका आशा इस वक्त लखनऊ जेल में बंद है। चौक की रहने वाली आशा को चार किलो स्मैक बरामदगी में जेल भेजा गया है।
कई शहरों से जुड़े आपराधिक तार
पुलिस सूत्रों के अनुसार शाह आलम पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खतरनाक गैंगों से जुड़ा है। गैंग के लिए आलम ने दिल्ली और हरियाणा में भी वारदात की हैं। मुंबई, लखनऊ, कानपुर, कानपुर देहात में भी उसके नाम अपराध दर्ज हैं और तकरीबन हर शहर में उसके ठिकाने हैं। पुलिस को फिलहाल चकेरी में एनडीपीएस और रेल बाजार में गैंगेस्टर की ही जानकारी मिल सकी है।
मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करता
आलम का कहना है कि वह मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करता है, इसलिए कभी पकड़ा नहीं जाता। हालांकि हीरा की हत्या के दौरान पुलिस को हत्यारोपी के कान में फोन की लीड लगे होने की जानकारी मिली थी। पुलिस की माने तो घटनास्थल टीटी पार्क और कोचिंग मंडी के बीच ही है, आलम को रिमांड पर लेकर उससे सही घटनास्थल का पता किया जाएगा।
बर्रा में खुल गए अपराध के अड्डे
बर्रा में कुछ महीनों तक बंद रहने के बाद स्मैक, शराब के अड्डे फिर खुल गए हैं। आलम ने पूछताछ में बताया है कि बर्रा दो, यादव मार्केट के आस-पास उसे स्मैक मिल जाती है। वहां कई कोचिंग भी हैं जिनके नए लड़कों को स्मैक माफिया अपने जाल में फंसाते हैं। वह और तमाम अपराधी वहां के अड्डों से स्मैक लेने आते थे।
इसके अलावा बाइपास पर खुले दर्जनों होटलों और रेस्टोरेंटों में अवैध रूप से शराब पिलाने के अड्डे भी हैं जहां अपराधियों का जमावड़ा लगता है। आस-पास के इलाकों से आने वाले अपराधी यहां नशा करने के बाद हाईवे पर फर्राटा भरते हैं और अक्सर लूट या अन्य वारदात करने से नहीं चूकते।