भाजपा में टिकटों के वितरण को लेकर उभरे विरोध के बाद यह खुलासा हुआ है कि पार्टी इस बार किसी भी सूरत में यूपी का चुनाव जीतना चाहती है। यही वजह है कि उन सभी जनाधार वाले नेताओं को टिकट दिया गया है जो दूसरी पार्टियों को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं।
पुराने कार्यकर्ताओं के बजाए बाहरी नेताओं की हुई ज्यादा पैरवी
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दूसरा खुलासा यह भी हुआ है कि पार्टी के पदाधिकारी जिन्हें टिकट बंटवारे में जिम्मेदार बनाया गया था, उन्हाेंने भी पुराने कार्यकर्ताओं के बजाए उनकी पैरवी ज्यादा की जो बाहर से आए थे। सोमवार को चुनाव की रणनीति और नाराज कार्यकर्ताओं से बात करने के लिए केंद्रीय इकाई से भेजे गए वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्र ने कार्यकर्ताओं से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि पार्टी का जीतना पहला मकसद है।
कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की 52 विधानसभा सीटों पर यदि दूसरी पार्टी से आए नेताओं को टिकट देने की बात की जाए तो कुल सात ऐसी सीटें हैं जिसे लेकर विरोध चल रहा है। जिसमें दो सीटों (बिठूर और बांदा) पर ऐसे प्रत्याशी हैं, जो एक महीने के अंतराल में भाजपा में शामिल हुए हैं। इसके अलावा एक सीट जहानाबाद है, जो अपना दल के खाते में गई है। वहां भी दूसरी पार्टी से आए नेता को टिकट दिया गया है।
दूसरे दलों से आए पत्याशियों को धड़ल्ले से बांटे टिकट, खफा पुराने नेता
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इसके अलावा चार सीटों पर जो टिकटें दी गई हैं, उनके प्रत्याशी भी दूसरे दलों से आए हैं, लेकिन भाजपा की सदस्यता उन्होंने काफी पहले ले ली थी। कहा जा रहा है कि पार्टी में सबसे ज्यादा इन्हीं सीटों को लेकर विरोध हो रहा है।
मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री नरोत्तम मिश्रा के अलावा चुनाव के लिए कानपुर क्षेत्र से प्रभारी बनाए गए अरविंद मेनन की कार्यकर्ताओं से हुई बातचीत में यह भी बताया जा रहा है कि 14 साल से यूपी में भाजपा की सरकार नहीं है, ऐसे में सरकार लाने पर जोर हर कार्यकर्ता का होना चाहिए। यह भी कहा गया कि सरकार बनेगी तो कार्यकर्ताओं का ही लाभ होगा। इसलिए किसी भी प्रत्याशी पर उंगली न उठाई जाए।