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कानपुर के पास अरौल में रातों-रात चटक गए रेल पथ के स्लीपर

Tue, 31 Jan 2017 12:21 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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टूटे रेल पथ के स्लीपर - फोटो : अमर उजाला
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कानपुर-फर्रुखाबाद रेल रूट पर अरौल मकनपुर रेलवे स्टेशन के रेल पथ के कई स्लीपर रातों-रात चटक गए। ग्रामीणों ने स्लीपर टूटने की जानकारी स्टेशन मास्टर को दी। 
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मकनपुर मेला शुरू होने से अरौल मकनपुर रेलवे स्टेशन पर हजारों की संख्या में जायरीनों के आने का सिलसिला जारी है। वहीं कानपुर के अरौल स्टेशन के पास रेल लाइन के कई स्लीपर चटके मिले, जिससे किसी हादसे के आशंका भरी बनी हुई है। आसपास के ग्रामीणों की मानें तो पिलर संख्या 65/3 के आसपास पर रेल लाइन स्लीपर कई दिनों से चटके हुए हैं, लेकिन अभी तक किसी भी रेल अधिकारी-कर्मी ने इसे संज्ञान नहीं लिया है। बिल्हौर रेलवे स्टेशन के रेल पथ जेई कमलेश कुमार झा ने बताया कि पिलर संख्या 65/0 तक ही उनका क्षेत्र है, इस के आगे का क्षेत्र कन्नौज रेलवे स्टेशन में आता है। वहीं जब कन्नौज के रेलपथ जेई अजय कुमार भटनागर से रेल पथ के टूटे स्लीपर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि रेलवे कर्मी रेल पथ का निरीक्षण करते हैं। यदि कहीं स्लीपर टूटे और चटके होते तो उनके पास इसकी सूचना जरूर होती।
 
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गोरखपुर-यशवंतपुर एक्सप्रेस के कोच का स्प्रिंग टूटा

डेमो पिक
गोरखपुर-यशवंतपुर एक्सप्रेस के एस-4 कोच का स्प्रिंग टूट गया। सोमवार दोपहर करीब 3:10 बजे सेंट्रल पहुंचने पर तकनीकी विभाग को इसकी जानकारी हुई तो अधिकारियों को अवगत कराया। काफी देर बाद भी जब स्प्रिंग नहीं बदला जा सका तो कोच को ही ट्रेन से अलग किया गया। इसके यात्रियों को दूसरे कोचों में शिफ्ट करके दो घंटे 10 मिनट देरी से शाम साढ़े पांच बजे रवाना की गई। हालांकि कोच के 24 यात्रियों ने अपने आरक्षण निरस्त कराया। पहिये और कोच के बीच में लगी स्प्रिंग शॉकर का काम करती है। स्प्रिंग टूटकर अपनी जगह से हटी नहीं थी। इस कारण कोई हादसा नहीं हुआ। स्प्रिंग न होती तो कोच में झटका लगता। पहिया भी बाहर निकल सकता था। उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ विजय कुमार का कहना है कि कोच न होने की स्थिति में यात्रियों को दूसरे कोचों में शिफ्ट किया जाता है। जैसे-जैसे सीट खाली होती जाती है, वैसे-वैसे बर्थ एलॉट की जाती है। 
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