फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपीः उरई में गिरफ्तार हुए 'बंटी-बबली', सरकारी योजनाओं के नाम पर बांट रहे थे लोन, एमपी तक फैला जाल  

Tue, 16 Oct 2018 11:08 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
पुलिस लाइन में खुलासा करते एसपी व एसपी व पुलिस के साथ खड़े आरोपी। 
विज्ञापन

केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं के नाम पर ठगी करने वाले बंटी-बबली को उरई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनके पास से कई फर्मों के फर्जी दस्तावेज और कुछ रुपये भी बरामद हुए हैं। एसपी अरविंद चतुर्वेदी ने बताया कि पकड़े गए युवक-युवती जनपद ही नहीं आसपास के जिलों में भी अपने पोस्टर और पंपलेट चस्पा कर लोगों को लोन दिलाने के नाम पर ठगने का काम करते थे।

विज्ञापन


इनके पास ठगी के शिकार लोगों के नाम और मोबाइल नंबरों का रजिस्टर भी मिला है। जिससे पता चल रहा है कि इनका मकड़जाल जालौन के अलावा हमीरपुर, चित्रकूट, बांदा और झांसी के अलावा एमपी के कई जिलों तक फैला हुआ था। फिलहाल गिरफ्तारी करने वाली टीम को 10 हजार रुपये के पुरस्कार की घोषणा की गई   है।  

पुलिस लाइन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए एसपी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी व एएसपी सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि थाना कैलिया जनपद जालौन के सामी गांव निवासी अजय कुमार पुत्र प्रभुदयाल ने पुलिस से शिकायत की थी कि कुछ लोग आम जनता को प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत जन शक्ति फाइनेंस कंपनी के नाम पर लोन दिलाने का लालच दे रहे हैं।  इस पर कोंच पुलिस और सर्विलांस टीम सक्रिय हुई। मंगलवार को पुलिस ने इन दोनों ठगों को उरई रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया।
विज्ञापन


इनके नाम शैलेंद्र राक्यवार उर्फ संजीव श्रीवास्तव निवासी पथाला खेड़ा थाना भगवा जनपद छतरपुर व ऊषा पाल उर्फ नेहा मिश्रा निवासी ग्राम टपरिइयन थाना पलेरा जनपद टीकमगढ़ हैं। एसपी ने बताया कि शैलेंद्र और ऊषा के मुताबिक वे पहले शहरों में फर्जी कंपनी के नाम पर आकर्षक लोन आसान शर्तों में उपलब्ध कराने संबंधी पोस्टर चस्पा करते और पंपलेट बांटते थे। जिसमें कुछ मोबाइल नंबर भी होते हैं। उन्हीं नंबरों पर संपर्क करने वालों को वे दोनों अपना शिकार बनाते थे। खास बात यह थी कि पूरे फर्जीवाड़े में शिकार उनके चेहरे नहीं देख पाते थे, सिर्फ आवाज ही सुना करते थे।   

विज्ञापन

इन योजनाओं के नाम पर होती थी ठगी 

पुलिस अधिकारियों के साथ पकड़े गए टप्पेबाज।  
एसपी ने बताया कि पकड़े गए टप्पेबाज केंद्र सरकार की कई योजनाओं के अलावा जनशक्ति कंपनी के नाम से प्रॉपर्टी, शिक्षा, व्यापार, मकान, कृषि कार्य के लिए 35 प्रतिशत छूट के साथ ऋण उपलब्ध कराने का झांसा देते थे। प्रत्येक शहर में तीन से पांच महीने तक रुककर ठगी करते थे। फिर दूसरे जिले पहुंच जाते थे।   

छोटी सी ठगी, पर आमदनी बड़ी 
पुलिस की मानें तो दोनों शातिर यूं तो लोन के लालच में फंसने वालों से कागजों की तैयारी के नाम पर 3 से 5 हजार की धनराशि अपने खाते में जमा कराते थे, लेकिन शिकार की अधिक संख्या के कारण यह धनराशि काफी बड़ी हो जाती थी। इस कारण ज्यादातर लोग शिकायत भी नहीं करते थे। 

10 लाख के लोन ने फंसा दिया  
हाल ही में इन टप्पेबाजों ने कैलिया किसान अजय कुमार को कृषि कार्य के लिए 10 लाख लोन का लालच दिया और अपने खाते में 10 हजार रुपये भी जमा करा लिए, बस यहीं से वह पुलिस के फंदे में फंस गए। शक होने पर अजय ने पुलिस से शिकायत की और फिर सर्विलांस सक्रिय हो गई।   

यह कागजात हुए बरामद  
टप्पेबाजों के पास से करीब 6 हजार रुपये के अलावा एक लैपटॉप, प्रिंटर, मोबाइल, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, आधार कार्ड, पेन कार्ड, पहचान पत्र, जेवरात, पंपलेट, रजिस्टर व कंपनी के फर्जी कागजात बरामद किए गए हैं। जिन्हें पुलिस ने अपनी जांच में शामिल किया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें