मृतक की फाइल फोटो व मौके पर मौजूद पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
फर्रुखाबाद में कायमगंज नगर से सटे गांव लालपुर पट्टी निवासी 80 वर्षीय भारतीय किसान यूनियन नेता का बेटे से घर सबमर्सिबल पंप लगाने को लेकर विवाद हो गया। इसकी सूचना पर पहुंची यूपी 112 पुलिस की मौजूदगी में भाकियू नेता ने खुद की लाइसेंसी बंदूक से गोली मार ली। उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
गांव लालपुर पट्टी निवासी सरदार बलवंत सिंह किसान यूनियन में ब्लाक अध्यक्ष थे। गुरुवार शाम को उनके बड़े पुत्र अशोक घर में सबमर्सिबल पंप लगवा रहे थे। तभी स्थल चयन को लेकर विवाद हो गया। पौत्रों ने पथराव कर दिया जो उन्हें नागवार गुजरा। छोटे पुत्र गजराज ने यूपी 112 पुलिस को सूचना दी। इस पर पुलिस पहुंच गई।
बलवंत सिंह ने अपनी लाइसेंसी सिंगल बैरल बंदूक निकाल ली। अशोक का कहना था कि उन्होंने पहले उन पर फायर किया, जो मिस हो गया। इसके बाद वह छत पर चढ़ गए। शायद कमरे में कारतूस लेने को घुसे होंगे। तभी छत पर मौजूद अशोक की पुत्र वधू आरती ने कमरे में बाहर से कुंडी लगा दी।
इस बीच यूपी 112 पुलिस का एक सिपाही सीढ़ियों से ऊपर की ओर चढ़ रहा था। तभी उन्होंने जंगले से एक फायर कर दिया। सिपाही घबराकर नीचे उतर गया। कुछ देर बाद एक फायर की आवाज और हुई। इसमें बलवंत सिंह ने खुद की गर्दन में गोली मार ली।
पुलिस व परिवार के लोग कुंडी खोलकर अंदर घुसे तो बलवंत सिंह की मौत हो चुकी थी। उनकी बंदूक शव के नीचे दबी थी। सूचना पर सीओ अवनीश कुमार व इंस्पेक्टर डॉ. विनय राय व मंडी चौकी प्रभारी ज्ञानेश्वर सिंह भी पहुंच गए। उन्होंने परिजनों से घटना के बारे में पूछताछ की और कमरे को बंद कर दिया।
छोटे पुत्र गजराज ने भाई व भतीजों पर झगड़ा करने का आरोप लगाया। बलवंत सिंह के दो पुत्र अशोक व गजराज एक ही मकान में रहते हैं। मंझला पुत्र उदयप्रताप दिल्ली में रहता है। एक दिव्यांग पुत्री रेखा है। सभी की शादियां हो गई हैं।
बलवंत सिंह के बड़े पुत्र अशोक की बेल्डिंग की दुकान अलीगंज रोड पर स्टेशन के पास है। दुकान पर काम कर वह बेटे की मदद भी करते थे। फोरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंच कर कुछ नमूने लिए। इंस्पेक्टर डा. विनय राय ने बताया पुलिस की मौजूदगी में फायर हुआ था, पुलिस नीचे थी। बलवंत ऊपर कमरे में बंद थे। अभी तक की जांच में मामला आत्महत्या का ही लग रहा है।
मकान को लेकर बेटों में चल रही मुकदमेबाजी
गांव लालपुर पट्टी स्थित जिस मकान में बलवंत सिंह व उनके पुत्र रहते हैं। वह दो मंजिल बना है। नीचे गजराज रहते हैं। ऊपर अशोक का परिवार व बलवंत रहते थे। यह मकान बलवंत की पत्नी जगरानी के नाम था। वर्ष 2012 में उन्होंने अपने जीवन काल में यह मकान अशोक के 6 पुत्रों व अपनी पुत्री रेखा के नाम वसीयत लिख दी थी। उनकी मौत के बाद जब गजराज को जानकारी हुई तो उन्होंने इस पर फर्जी वसीयत कराने का मुकदमा कर दिया था। तब से अशोक व गजराज के बीच अनबन भी है।