फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फोन पर हर रोज एक लाख की ऑनलाइन लूट, क्राइम ब्रांच ने 50 लोगों की रकम वापस कराई

Sun, 11 Sep 2016 12:13 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
डेमो
विज्ञापन
कानपुर शहर में हर रोज एक लाख की ’ऑनलाइन लूट’ हो रही है इस हिसाब से हर महीने करीब 30 लाख रुपये ऑनलाइन फ्रॉड के जरिये लोगों से छीने जा रहे हैं। तरीका सिर्फ एक है फोन पर एटीएम/डेबिट कार्ड धारकों से पिन, सीवीवी नंबर पूछकर चंद मिनटों में रकम निकाल ली जाती है। भोले भाले लोगों को जबतक धोखाधड़ी होने का पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। ऑनलाइन फ्रॉड के ये आंकड़े पुलिस रिकॉर्ड को खंगालने के बाद सामने आए हैं।  जानिए कैसे होती फोन पर  ‘ऑनलाइन लूट’
विज्ञापन

सीओ क्राइम ब्रांच विवेक त्रिपाठी ने बताया ऑनलाइन ठग फर्जी आईडी से कई सिमकार्ड लेकर शिकार को फोन करते हैं। पहला ठग शिकार को फोन कर उसका कार्ड ब्लाक होने या सुरक्षा की दृष्टि से अपडेट करने की बात कहता है। दूसरा ठग अपने मोबाइल पर पेमेंट गेटवे खोलता है जिसपर ऑनलाइन शापिंग, फोन बैलेंस जैसे कई ऑप्शन होते हैं। किसी भी ऑप्शन को क्लिक करते ही पेमेंट करने वाले  कार्ड का सीवीवी(कार्ड वेरीफिकेशन वैल्यू) नंबर पूछा जाता है। पहला ठग शिकार से कार्ड के पीछे की ओर लिखे 3 अंक(कुछ बैंक में 4 अंक) का सीवीवी नंबर पूछता है। सीवीवी नंबर मिलते ही दूसरा ठग उसे किसी पेमेंट गेटवे या ई- मर्चेंट पर डालता है। पहला ठग शिकार से कहता है कि अपने नंबर पर आए ओटीपी(वन टाइम पासवर्ड) को बताएं। जैसे ही शिकार ओटीपी बताता है ठग ओटीपी इस्तेमाल कर खरीददारी, फोन रिचार्ज या कई मामलों में रकम भी खाते में ट्रांसफर कर लेते हैं। खरीददारी या कैश ट्रांसफर होते ही पीड़ित के पास मैसेज तो आता है लेकिन पीड़ित कुछ नही कर पाता।
तुरंत क्राइम ब्रांच से संपर्क करने पर फायदा
पैसा निकलने का मैसेज आते ही पीड़ित को सबसे पहले बैंक को सूचना दे कार्ड को ब्लॉक करवाना चाहिए। इसके बाद पुलिस से संपर्क करना चाहिए। कई मामलों में खरीददारी करते समय वस्तु की डिलिवरी(48 घंटे) के बाद ही खाते से पैसा निकलता है। जबकि पेमेंट गेटवे से बैंक में पैसा तुरंत ट्रांसफर हो जाता है। वस्तु की डिलिवरी और खाते में पैसा ट्रांसफर होने से पहले पुलिस संबंधित बैंक या ई- मर्चेंट से संपर्क कर ले तो पैसा वापस आ सकता है। पुलिस धोखाधड़ी की जानकारी देते हुए ई- मर्चेंट से वस्तु की डिलिवरी रुकवा सकती है। डिलिवरी रुक गई तो पीड़ित के खाते से पैसा भी नही निकल पाएगा।
विज्ञापन

कोर्ट के आदेश से वापस आता है पैसा
सीओ क्राइम ब्रांच विवेक त्रिपाठी के मुताबिक जिन मामलों में पेमेंट गेटवे के माध्यम से पैसा एक खाते से दूसरे खाते में जाता है वहां पैसा कोर्ट के आदेश से ही वापस मिलता है। इसके लिए एफआईआर दर्ज कर  भी बैंक को ई- मेल करके पैसा ट्रांसफर रुकवाया जाता है।   पशुपतिनगर के धनेश दीक्षित के 22969, सिविल लाइंस के रवि मेहरोत्रा के 8004, कल्याणपुर के शिवनारायण शर्मा के 9999, विनोद अग्रहरि के 10000 समेत करीब 50 लोगों के हजारों रुपये पिछले 5 महीने में वापस आए हैं।
विज्ञापन

जानकारी ही बचाव
ऑनलाइन ठगी के मामले में जानकारी ही आपको बचा सकती है
- कोई बैंक किसी ग्राहक को कभी कार्ड ब्लाक, रिन्यू करने के लिए फोन नहीं करता।
- किसी भी सूरत में किसी को अपना पिन, सीवीवी नंबर न बतायें।
- मोबाइल पर बैंक से आए मैसेज जरूर चेक करें।
- खाते से पैसा निकलते ही खाते को तुरंत ब्लॉक करवायें।
- बैंक की निकटतम शाखा से संपर्क करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें