सीएसजेएम यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन का कहना है भारत में पढ़े-लिखे लोग सबसे ज्यादा सुसाइड करते हैं। यह गंभीर है। जब मानसिक तनाव चरम पर पहुंचता है तो लोग आत्महत्या की सोचने लगते हैं। यदि उस समय अपनों से बात कर लें तो यह विचार निकल जाता है। जो लोग अचानक अपनों से कटने लगे, एकांत में रहने लगें तो उन पर नजर रखें।
पीपीएन कॉलेज के औचक निरीक्षण को पहुंचे कुलपति ने विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर चल रही गोष्ठी में अपने विचार रखे। कहा कि पढ़ाई-लिखाई के बाद महत्वाकांक्षा बढ़ने, उनके पूरे न होने, जॉब सिक्योरिटी आदि की वजह से ऐसे मामले बढ़े हैं। कॉलेज की मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. आभा सिंह ने कहा कि आत्महत्या के मामले में भारत नंबर वन है। हर साल 1.35 लाख लोग आत्महत्या कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि ज्यादा साक्षरता वाले महाराष्ट्र, बंगलूरू और तमिलनाडु में आत्महत्या के मामले सबसे ज्यादा हैं तो बिहार में कम जबकि बिहार में साक्षरता दर कम है। प्रिंसिपल डॉ. एसके सिंह, डॉ. रश्मि मिश्रा, डॉ. रिजवाना, शिवांगी तिवारी, डॉ. रितु मोदी समेत 40 लोगों ने अपने विचार रखे। डॉ. एसएस कुशवाहा, डॉ. एके गुप्ता और उर्सला की डॉ. ममता यादव निर्णायक रहीं। अच्छा प्रेजेंटेशन देने वाली तीन स्टूडेंटों को सम्मानित किया गया।
इस वजह से आते हैं मरने के विचार
डेमो पिक
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इस वजह से आते हैं विचार
-किसी अपने की मौत या उसके खो जाने पर
-किसी रिश्ते के टूट जाने या तलाक होने पर
-निजी रिश्तों में कोई समस्या आने पर
-किसी प्रकार का दुर्व्यवहार होने पर
-जीवन में कोई भी लक्ष्य न होने पर
-अपने जीवन पर कोई नियंत्रण न होने पर
-व्यापार या नौकरी में दिक्कत होने पर
ऐसे बच सकते हैं
-कोई भी गलत कदम उठाने से पहले किसी अपने से मन की बात करें
-अपने परिवार के लोगों और दोस्तों से दिल खोलकर बात करें
-यदि कोई खास न हो तो काउंसलर के पास चले जाएं
-अपने लिए हमेशा अच्छा सोचें
-ताजी हवा में सुबह सैर को निकलें, इससे नकारात्मक विचार नहीं आएंगे
-कुछ नया करें। नई भाषा सीखें, नई हाबी ट्राई करें
-किसी जरूरतमंद की मदद करें
-खुद पर नकारात्मक विचार हावी न होने दें।
सर्दी, जुकाम की तरह मानसिक तनाव को भी गंभीरता से लें और तत्काल मनोचिकित्सक से संपर्क करें।