सबसे ज्यादा लोकप्रिय खेल बन चुके IPL10 में हाईप्रोफाइल सट्टेबाजों का ‘मनी मेकिंग गेम’ उजागर हो गया है। ये सट्टेबाज जीत के लिए किसी भी हद तक गुजर जाते थे, पिच पर तेजाब डालना, पानी डालकर गीली करना इनके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी। सट्टेबाज गैंग के मास्टरमाइंड को पकड़ने के बाद बुकीज के पूरे ‘खेल’ का पता लगाने की कोशिश शुरू हो चुकी है। आगे और भी लोग पकड़़े जा सकते हैं। आईपीएल में सट्टेबाजी करने आए कानपुर शहर में रुके दो सटोरियों को बीसीसीआई की एंटी करप्शन सेल के इनपुट पर क्राइम ब्रांच और पुलिस ने होटल लैंडमार्क से गिरफ्तार किया है। जबकि एक को होटल के पीछे से गिरफ्तार किया गया है। दोनों सटोरिये इसी होटल में खिलाड़ियों के कमरों के पास रुके थे। मास्टर माइंड भारतीय अंडर 17 टीम का पूर्व खिलाड़ी मुंबई का नयन रमेश शाह निकला। इसके पास से चार लाख रुपये, पांच मोबाइल बरामद हुए हैं। वहीं, एक साथी ग्राउंड में होर्डिंग लगाने का काम करता है, जो सटोरियों के कहने पर पिच से छेड़छाड़ करता था। पुलिस को नयन रमेश के पास से डायरी मिली है जिसमें सट्टेबाजों के बड़े गैंग का पता चला है। साथ ही व्हाट्सएप की चैटिंग में कई बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।
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खिलाड़ियों के होटल में ही ठहरे थे सट्टेबाज
डेमो
एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया कि बुधवार रात ग्रीनपार्क स्टेडियम में गुजरात लायंस और दिल्ली डेयरडेविल्स के बीच मैच चल रहा था। इसी दौरान बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) की एंटी करप्शन एंड सिक्योरटी प्रमुख नीरज कुमार ने उन्हें सूचना दी कि मैच में सट्टा लगाने वाले कुछ लोग होटल लैंडमार्क में ठहरे हैं। उनके निर्देश पर क्राइम ब्रांच और कोतवाली पुलिस के साथ होटल में छापा मार 17वीं मंजिल में स्थित कमरा नंबर-1733 में रुके मुंबई वेस्ट क्षेत्र के अनमोल सीएचएसएल ब्रहमंड फेज-6 जीबी रोड यूनिवर्सल, साला समोद निवासी नयन रमेश शाह और कानपुर देहात के पुखरायां अंबेडकर नगर निवासी विकास चौहान को धर दबोचा। नयन मूल रूप से गुजरात का रहने वाला है उसके पास से तीन मोबाइल फोन, 4.30 लाख रुपये नगद और एक डायरी मिली है। जबकि विकास के पास से 40 हजार रुपये, दो मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। पुलिस ने इसके बाद होटल लैंडमार्क के पीछे से कानपुर के चुन्नीगंज निवासी रमेश कुमार को दबोच लिया। उसके पास से एक मोबाइल और 20 हजार रुपये मिले।
पिच पर डालते थे तेजाब
कानपुर में गिरफ्तार हुए सटोरिये
एसएसपी के मुताबिक मूल रूप से बिहार का रहने वाला रमेश कुमार ग्रीन पार्क में ब्रांडिंग (ग्राउंड में होर्डिंग) लगाने का काम करता है। रमेश कुमार ही रमेश शाह को पिच के बारे में पूरी जानकारी देता था। उसे पिच की मोबाइल से फोटो खींच कर भेजता था। रमेश शाह के कहने पर रमेश पिच से छेड़छाड़ करता था। पिच पर पानी और तेजाब डाल देता था।
सटोरियों को पिच के फोटोग्राफ भेजता था
डेमो पिक
एसएसपी ने बताया कि शाह का देश के हर स्टेडियम में नेटवर्क है। इसलिए उसे हर स्टेडियम की पिच के मिजाज की पल-पल की जानकारी मिल जाती थी। वह सटोरियों को पिच के फोटोग्राफ भेजता था। उसी आधार पर सट्टे का भाव तय होता था। होटल के जिस कमरे से शाह और उसके साथी पकड़े गए हैं, उसे सील कर दिया गया है। साथ ही कॉमन हॉल, सीसीटीवी का कंट्रोल रूम सील कर जांच की जा रही है। फुटेज भी देखे जा रहे हैं कि शाह और उसके साथियों से कौन-कौन मिला है, किसने उससे बात की है।
सटोरियों का बड़ा नेटवर्क
डेमो पिक
पुलिस के अनुसार शाह का नेटवर्क देश में ही नहीं विदेश में भी फैला है। पुलिस को मिली डायरी और मोबाइल से पता चला है कि राजस्थान के अजमेर में रहने वाला बुकी (सटोरिया) बंटी अजमेरी, अफ्रीका का हनीफ (इस वक्त गुजरात में रह रहा है) शाह से जुड़े थे। साथ ही मुंबई का एक सटोरिया भी शाह के संपर्क में था। पुलिस टीमें भेज दी गईं हैं। एसएसपी के मुताबिक हनीफ और बंटी मुख्य सटोरिये हैं, जो इस गैंग को संचालित कर रहे हैं। पकड़े गए नयन रमेश शाह के मोबाइल में मिली व्हाट्सअप चैट के आधार पर टीम के खिलाड़ियों, आईपीएल व होटल लैंडमार्क प्रबंधन के साथ ही ग्रीन पार्क के स्टाफ को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
कानपुर के होटल लैंडमार्क में सटोरिये पकड़ने के मामले में आईपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ला का कहना है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की एंटी करप्शन टीम का काम बुकी यानी सटोरिये पकड़ना है। इससे गुजरात लायंस और दिल्ली डेयरडेविल्स टीमों के खिलाड़ियों से कोई लेना देना नहीं है। देशभर में सटोरिये पकड़े गए हैं लेकिन इसमें मैच फिक्सिंग जैसी कोई बात नहीं है।
होटल बुकिंग के मामले में आईपीएल कमिश्नर का कहना है कि आईपीएल मैच के दौरान शहर के सभी प्रमुख होटलों की बुकिंग की जाती है। लैंडमार्क में सटोरिये ने पहले से ही कमरा बुक करा रखा था। वैसे भी पूरा होटल आईपीएल में नहीं बुक कराया जाता है। अलग-अलग होटलों में कमरें बुक कराए जाते हैं। ताकि खिलाड़ी, कमेंट्रेटर, स्कोरर, बीसीसीआई पदाधिकारी अलग-अलग ठहरे।