उन्नाव। असोहा थाना क्षेत्र में दो किशोरियों की हत्या व एक की हत्या के प्रयास के सह आरोपी को न्यायालय ने नाबालिग माना है। किशोर न्याय बोर्ड ने उसे राजकीय संप्रेक्षण गृह लखनऊ भेजा है। फैसला आने के बाद पिता ने पुलिस पर जल्दबाजी में बेटे की उम्र की तस्दीक किए बिना बालिग मानने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि पुलिस की गलती के कारण बेटे को आरोपी के साथ जेल में रहना पड़ा।
एक गांव में बुआ-भतीजी की हत्या व चचेरी बहन की हत्या के प्रयास में पुलिस ने 19 फरवरी को पड़ोसी गांव पाठकपुर निवासी मुख्य आरोपी विनय व उसके नाबालिग दोस्त (सह आरोपी) को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने खुलासे के वक्त सह आरोपी को नाबालिग बताया था। अगले दिन 20 फरवरी को आधार कार्ड में उसकी उम्र 19 साल दर्ज होने से उसे बालिग बता मुख्य आरोपी के साथ कोर्ट में पेश किया। वहां से दोनों को जेल भेज दिया गया था। सह आरोपी के पिता ने स्कूल के प्रपत्रों के आधार पर बेटे की उम्र 14 वर्ष बताकर उसे नाबालिग बताया था। बाद में पुलिस ने सह आरोपी की उम्र से संबंधित प्रपत्र उसके स्कूल से प्राप्त किए। इसमें उसकीउम्र 13 वर्ष छह माह 15 दिन निकली। सोमवार को विवेचक असोहा एसओ ओमप्रकाश रजक ने न्यायालय में उम्र संबंधी दस्तावेज पेश कर प्रार्थना पत्र दिया था। इस पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने एसओ को आरोपी के साथ मंगलवार को तलब किया था। मंगलवार दोपहर एसओ जेल से आरोपी को लेकर न्यायालय पहुंचे। सीजेएम ने प्रपत्रों के आधार पर सह आरोपी को नाबालिग पाते हुए किशोर न्याय बोर्ड भेज दिया। किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान न्यायाधीश ने प्रपत्रों को देखकर सह आरोपी को नाबालिग ठहराया और राजकीय संप्रेक्षण गृह लखनऊ भेजने का आदेश दिया। पुलिस ने उसे संप्रेक्षण गृह पहुंचा दिया है।
पूर्व बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष (न्यायपीठ) अरिंदम सिंह ने बताया कि पुलिस ने सह आरोपी की उम्र को लेकर शुरुआती दौर में जल्दबाजी में गलत फैसला लिया। आधार कार्ड से पहचान की तस्दीक होती है, उम्र की नहीं। उम्र की तस्दीक के लिए पुलिस को परिवार रजिस्टर की नकल या शैक्षिक प्रपत्र हासिल करने चाहिए थे। नाबालिग को जेल भेजे जाने से उस पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ा है और भविष्य में भी यह असर उस पर हावी रहेगा।