कानपुर देहात के किशोर न्यायालय में पेशी के बाद खुशी को बालिका संरक्षण गृह ले जाती पुलिस। संवाद
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कानपुर देहात। बिकरू कांड में आरोपी नाबालिग खुशी की मानसिक स्थिति के प्रारंभिक निर्धारण के लिए गुरुवार को किशोर न्याय बोर्ड ने उससे लंबी बातचीत की। उसे बाराबंकी के बालिका संरक्षण गृह से कड़ी सुरक्षा के बीच लाया गया था। उसके माता-पिता भी मिलने पहुंचे थे। अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी।
दो जुलाई को कुख्यात विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई पुलिस पर गोलियां चलाई गई थीं। सीओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे। पुलिस एनकाउंटर में मारे गए अमर दुबे की कथित पत्नी नाबालिग खुशी को आरोपी बनाया है। किशोर न्याय बोर्ड ने उसकी उम्र का निर्धारण कराया तो वह घटना के दिन 16 साल दस महीने 12 दिन की थी। इसके बाद खुशी को माती जेल से बालिका संरक्षण गृह, बाराबंकी भेजा गया था। गुरुवार को सुनवाई के लिए उसे किशोर न्याय बोर्ड में पेश किया गया। वहां बोर्ड ने उसकी मानसिक स्थिति परखने के लिए करीब 10 मिनट तक घटनाक्रम के बाबत बात की। बोर्ड ने खुशी की घटना में भूमिका समझने की कोशिश की। इसके साथ यह भी जानने की कोशिश की गई कि क्या वह अपराध कर सकती है। खुशी के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने खुशी की मानसिक स्थिति का परीक्षण विशेषज्ञों से कराने का अनुरोध न्यायालय से किया है। उन्होंने बताया कि घटना में खुशी के शामिल होने का कोई साक्ष्य पुलिस के पास नहीं है। पुलिस ने बदले की भावना से खुशी को अमर दुबे से जोड़कर आरोपी बना दिया है।