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कोर्ट ने विवेचक व गवाह का वेतन रोकने का दिया आदेश

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कानपुर देहात। अमराहट में सात वर्ष पूर्व जानलेवा हमले व बलवा के मामले में विवेचक रहे तत्कालीन थानाध्यक्ष व गवाह कांस्टेबिल नोटिस के बाद भी कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहे हैं। इससे मामले की सुनवाई नहीं हो पा रही है। नाराज अदालत ने दोनों का वेतन रोकने के लिए इटावा एसएसपी व कानपुर एसएसपी को पत्र लिखा है। विवेचक इटावा में तैनात हैं जबकि गवाह कानपुर एसएसपी के यहां तैनात है।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता लाल मोहम्मद ने बताया कि अमराहट गांव में 29 दिसंबर 2013 को खूंटा तोड़ने के विवाद में मारपीट व पथराव हुआ था। रामस्वरूप ने गांव के ही ब्रजपाल, सुरेंद्र, अशोक, वीर सिंह पर जानलेवा हमला व बलवा की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रामस्वरूप का भाई ओमकार घायल हो गया था। मामले की विवेचना तत्कालीन थानाध्यक्ष संतोष कुमार चंदेल ने की थी। वह विवेचक के साथ मामले में गवाह भी हैं। वहीं अमराहट थाने का सिपाही निजानंद भी गवाह है। संतोष कुमार चंदेल इटावा में एसएसपी के यहां बतौर जनसंपर्क अधिकारी के रूप में तैनात हैं, वहीं सिपाही निजानंद कानपुर एसएसपी के यहां तैनात है। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम प्रवीण कुमार पांडेय की अदालत में चल रही है। अदालत के नोटिस के बावजूद दोनो हाजिर नहीं हुए। इस पर अदालत ने दोनों को सम्मन जारी किया था। इसके बावजूद वह अदालत नहीं पहुंचे। इस पर सोमवार को अदालत ने विवेचक का वेतन रोकने के लिए इटावा एसएसपी को और सिपाही का वेतन रोकने के लिए कानपुर एसएसपी को पत्र भेजा है।
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