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जुमे की तकरीर में कहा गया, ‘गाय का गोश्त बीमारी’

Sat, 13 May 2017 10:00 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
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‘गाय का गोश्त खाना बीमारी है बल्कि गाय का दूध और घी सेहत के लिए फायदेमंद है।’ यह बात शुक्रवार को कानपुर में जुमे की तकरीर के दौरान नमाजियों के बीच कही गई। चमनगंज नाला रोड की गुलाब घोसी मस्जिद के इमाम मौलाना अब्दुर्रज्जाक ने कहा कि केंद्र सरकार को चाहिए कि गाय के गोश्त पर पूरे देश में पाबंदी लगाने के लिए संसद से कानून बना दे। इस मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए।
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मौलाना अब्दुर्रज्जाक ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ने भी फरमाया है कि गाय का गोश्त खाने से बीमारी होती है। जबकि उसका दूध दवा और गाय का घी शिफा (बीमारी में फायदा) होता है। एक मजहब की आस्था भी गाय से जुड़ी है। केंद्र सरकार अगर गोरक्षा पर गंभीर है तो उसे संसद में कानून बना देना चाहिए क्योंकि कोलकाता, गोवा और पूर्वोत्तर के राज्यों में गाय का गोश्त बिकता है।   जिस तरह से राष्ट्रीय पशु, राष्ट्रीय पक्षी को मारने वालों का सजा का प्रावधान है। उसी तरह से गाय को काटने का पूरे देश के लिए एक अपराध की श्रेणी में लाना चाहिए। गाय का गोश्त एक बीमारी है, इसलिए किसी को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
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  इसके अलावा चमनगंज तकिया पार्क, दादामियां मस्जिद समेत कई मस्जिदों में भीषण गर्मी से निजात की अल्लाहताला से दुआ की। इससे कि गरीब, बेसहारा और बेघर जिंदगी गुजार रहे लोगों की जिंदगी बच सके।
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