17 साल पहले वर्ष 2003 में सार्स से निपटने के लिए तैयार किए गए अस्त्र से कोरोना वायरस कोविड-19 पर वार होगा। जेनेटिक इंजीनियरिंग से तैयार हीट शॉक प्रोटीन (एचएसपी)-70 रोगी के शरीर में इंसुलिन की तरह डाली जाएगी जिससे कोविड-19 के संक्रमण से रोगी का सांस तंत्र फेल नहीं पाएगा।
इससे रोगी की मौत नहीं होगी और रिकवरी तेज हो जाएगी। यह शोध वर्ष 2003 में स्विटजरलैंड के लॉजेन विवि की बायो केमिस्ट्री विभाग ने शुरू किया था। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेजाइनेशन ने अब इस पर काम आगे बढ़ाने के लिए कहा है। इस शोध टीम में चित्रकूट जिले के डॉ. सत्यम तिवारी भी शामिल हैं। यह शोध दो बार बंद हो चुका है, अब इसे तीसरी बार शुरू किया गया है।
वर्ष 2003 में जब कोरोना घराने के वायरस सार्स का प्रकोप हुआ तो लाजेन विवि के बायो केमिस्ट्री विभाग ने इस पर शोध शुरू किया। सार्स में भी रोगी का सांस तंत्र ध्वस्त होने से मौत होती थी। रोगी एक्यूट रेस्पेरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) में चले जाते रहे। इस पर विज्ञानियों ने एचएसपी-70 की अतिरिक्त डोज दी तो चूहे एआरडीएस में नहीं गए।
जब तक यह शोध पूरा होता, सार्स महामारी खत्म हो गई। वित्तीय समस्या होने पर शोध को रोक दिया गया। इसके नौ साल के बाद कोरोना घराने का एक नया वायरस मर्स आया। यह अधिक घातक था। सार्स तो बच्चों पर अधिक अटैक करता था, मर्स ने अपनी गिरफ्त में सबको लपेट लिया। मर्स के आने पर शोध को फिर शुरू किया गया और मर्स के जाते ही बंद कर दिया गया।
अब कोरोना वायरस परिवार का नया वायरस कोविड-19 आया है तो फिर वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने इस काम शुरू कराया है। इस संबंध में शोध टीम के विज्ञानी डॉ. सत्यम तिवारी से फोन पर बात हुई। उन्होंने बताया कि यह शोध अंतिम चरण में हैं। बहुत जल्दी एचएसपी-70 के इंजेक्ट करने से कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति को एआरडीएस में जाने से बचाया जा सकेगा। इससे मौत नहीं होगी। इसमें मौत का मुख्य कारण सांस तंत्र का फेल होना (एआरडीएस) होता है।
कोविड-19 ऐसे करता है घात
वायरस फेफड़ों की कोशिकाओं में घुस जाता है। वह कोशिका के प्रोटीन और इसकी मशीनरी पर कब्जा कर लेता है और इसे अपने लिए इस्तेमाल करके रेप्लीकेट करता है। कोशिका मर जाती है। सांस तंत्र फेल होता है। रोगी को बुखार आता है जिससे प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। इससे शरीर की प्रोटीन बनाने की क्षमता घट जाती है।
ऐसे होगा वार
जब वायरस फेफड़े की कोशिकाओं की प्रोटीन पर कब्जा कर लेगा और शरीर की प्रोटीन बनाने की प्रक्रिया धीमी हो जाएगी तो इंसुलिन की तरह शरीर में जेनेटिक इंजीनियरिंग से तैयार एचएसपी-70 इंजेक्ट की जाएगी। इससे शरीर में प्रोटीन की कमी नहीं होगी। सांस तंत्र फेल होने से बचा रहेगा, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता वायरस को शरीर से बाहर कर देगी।