स्वदेशी कोरोना वैक्सीन कोवाक्सिन की क्षमता 80 फीसदी से अधिक पाई गई है। दुनिया की यह ताकतवर वैक्सीन मानी जा रही है। यह भी उम्मीद की जा रही है कि कोरोना का जो नया स्ट्रेन साउथ अफ्रीका और ब्रिटेन में आया है, उससे भी कोवाक्सिन प्रतिरोधकता प्रदान करेगी।
फेज-एक के बाद अब अंतरराष्ट्रीय जर्नल लॉंसेट ने कोवाक्सिन के दूसरे ट्रायल को भी प्रकाशित किया है। भारत बायोटेक द्वारा तैयार की गई स्वदेशी कोरोना वैक्सीन के दूसरे फेज के ट्रायल में देश भर के सेंटरों से 380 वॉलिंटियर शामिल किए गए थे।
इनमें शहर के भी 42 वॉलिंटियर शामिल रहे हैं। प्रदेश में शहर के प्रखर अस्पताल में कोवाक्सिन के तीनों ट्रायल हुए हैं। फेज-एक में 33 वॉलिंटियर को शामिल किया गया था, वहीं फेज दो में नौ वॉलिंटियर और बढ़ा दिए गए थे। कोवाक्सिन के दूसरे फेज के ट्रायल में 12 साल से लेकर 65 साल तक के लोगों को शामिल किया गया था।
इसके साथ ही डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा आदि से पीड़ित ऐसे कोमॉर्बिड लोगों को शामिल किया गया था जिनके रोग नियंत्रित रहे हैं। कोवाक्सिन ट्रायल के चीफ इन्वेस्टीगेटर यूपी डॉ. जेएस कुशवाहा का कहना है कि कोवाक्सिन को विश्व स्तरीय मान्यता मिल रही है। यह वैक्सीन निष्क्रिय कोरोना वायरस से ही तैयार की गई है। यह साउथ अफ्रीकी, ब्रितानी समेत कोरोना के किसी भी नए स्ट्रेन से मुकाबला कर लेगी। इसमें बहुत अच्छी एंटी बॉडीज बनी हैं।