अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर। अनियमित दिनचर्या के कारण हृदय रोगियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। देश में इस समय छह करोड़ हृदय रोगी हैं। इस कारण किडनी, लिवर और ब्रेन पर भी असर पड़ रहा है। लोग अनदेखी न करें तो शुरुआती दौर में दवाओं से ही हार्ट की बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। यह जानकारी दिल्ली के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रजनीश मल्होत्रा ने रविवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कॉलेज ऑफ जनरल प्रैक्टिशनर्स (आईएमए सीजीपी) के आखिरी दिन लालपत भवन में दी।
उन्होंने कहा कि जब पेस मेकर भी काम नहीं करता तो हार्ट की पंपिंग मेंटेन रखने के लिए एलवीएडी (लेफ्ट वेंट्रिकल असिस्ट डिवाइस) लगाई जाती है। इसका खर्च तकरीबन 60 लाख रुपये आता है। डॉक्टरों के साथ मिलकर आईआईटी चेन्नई इसे भारत में तैयार करने की कोशिश कर रहा है। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अवधेश पांडेय ने कहा कि उपकरणों के साथ अच्छी दवाएं भी आ गई हैं। लोगों को समय-समय पर जांच करानी चाहिए। कार्यक्रम में देर रात दिल्ली के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। इस दौरान आईएमए अध्यक्ष प्रो. आरती लाल चंदानी, सचिव डॉ. अर्चना भदौरिया, डॉ. एके त्रिवेदी, डॉ. पीसी बाजपेई, डॉ. एचएस चावला, डॉ. इंद्रजीत सिंह आहूजा, डॉ. विकास मिश्रा, डॉ. गौरव चावला आदि मौजूद रहे।
सीईए के खिलाफ डॉक्टरों का धरना 30 जुलाई को
क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) के खिलाफ आईएमए ने आवाज बुलंद की। यूपी आईएमए के अध्यक्ष डॉ. एपी सिंह ने कहा कि सीईए के कुछ प्रावधानों के खिलाफ 30 जुलाई को पूरे प्रदेश में डॉक्टर धरना देंगे और सीएम को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपेंगे। रविवार को आईएमएसीजीपी में पहुंचे अध्यक्ष डॉ. एपी सिंह, सचिव डॉ. आनंद प्रकाश, डॉ. जे प्रसाद, पूर्व अध्यक्ष डॉ. एमवी सक्सेना, डॉ. अशोक अग्रवाल, डॉ. अमिताभ श्रीवास्तव ने कहा कि हम सीईए का विरोध नहीं कर रहे हैं, इसके कुछ प्रावधानों से डॉक्टरों के साथ ही मरीजों पर भी बोझ पड़ेगा।