धीरेंद्र ने बताया कि वह पत्नी उर्मिला और बेटे के साथ अहमदाबाद में तीन साल से रह रहे थे। गांव में खेती न होने के कारण वह नौकरी के लिए अहमदाबाद चले गए थे। वहां कपड़ा फैक्टरी में नौकरी कर रहे थे। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि हालात फिर से इस कदर बिगड़ेंगे कि सबकुछ बेचकर फिर से घर लौटना पड़ेगा।
देशभर में कोरोना के कहर के बीच प्रवासी कामगारों ने इस बार सबकुछ बंद होने से पहले ही अपने घरों को लौटना शुरू कर दिया है। गुजरात के अहमदाबाद से अपने घर अंबेडकरनगर लौट रहे प्रवासी ने बताया कि सारी गृहस्थी बेचकर उसने 20 हजार रुपये जुटाए। हर जगह इस कदर लूट मची है कि कानपुर तक पहुंचने में ही उसके 10 हजार रुपये खर्च हो गए।
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मूलरूप से अंबेडकरनगर के रहने वाले धीरेंद्र ने बताया कि वह पत्नी उर्मिला और बेटे के साथ अहमदाबाद में तीन साल से रह रहे थे। गांव में खेती न होने के कारण वह नौकरी के लिए अहमदाबाद चले गए थे। वहां कपड़ा फैक्टरी में नौकरी कर रहे थे। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि हालात फिर से इस कदर बिगड़ेंगे कि सबकुछ बेचकर फिर से घर लौटना पड़ेगा।
पिछले साल लॉकडाउन के दौरान किराये के कमरे में ताला बंद कर बमुश्किल घर पहुंचे थे। हालात सामान्य होने पर परिवार के साथ फिर से काम करने अहमदाबाद पहुंच गए थे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वहां के हालात पूर्व से भी बदतर हो चुके हैं।
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अब लॉकडाउन की आशंका के बीच उन्होंने पहले ही अहमदाबाद छोड़ दिया। उनके साथ काम करने वाले दर्जनों लोग अपने घरों का रुख कर गए हैं। इस बार उन्होंने वापस न लौटने की कसम खाई है। धीरेंद्र ने बताया कि घर लौटने के लिए फैक्टरी मालिक से रुपये मांगे, लेकिन उसने देने से इनकार करते हुए वहीं रुकने को कहा।
इस पर कमरे में रखा सारा सामान 20 हजार रुपये में बेच दिया। कानपुर आते-आते करीब 10 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। बताया कि हर जगह लूट मची है। साथ में पत्नी और बच्चे को देखकर पांच रुपये की चीज 20 रुपये में दी जा रही है।