जून के आठ दिन के अंदर कोरोना से छह मौतें हुई हैं। इनमें दो रोगी सिर्फ ऐसे रहे हैं जिनमें सिर्फ कोरोना के लक्षण थे, दूसरे कोई रोग की जटिलताएं नहीं थीं। इससे कोरोना वायरस के और अधिक आक्रामक होने के संकेत मिल रहे हैं।
ऐसे में पुराने रोगियों और बुजुर्गों को खासतौर पर सतर्क रहने की जरूरत है। सोशल डिस्टेंसिंग की अनदेखी कतई न करें। यह खतरनाक साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने सुझाव दिया है कि बच्चे अपने बुजुर्गों की हिफाजत करें।
अगर बाहर जाते हैं तो सीधे आकर दादा-दादी, नाना-नानी से न मिलें। पहले कपड़े बदलें और अपने को साफ कर लें। सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला का कहना है कि सबसे जरूरी है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाए।
ये बरतें सावधानियां
- पुराने रोगी अपने डाक्टर से संपर्क कर दवा का डोज दुरुस्त कराएं।
- कोई मर्ज बढ़ने पर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता घट सकती है।
- बुजुर्गों, पुराने रोगियों से जुकाम-बुखार के रोगी दूरी बनाए रखें।
- घर में रहने पर मास्क का इस्तेमाल कर सकते हैं, हाथ धोते रहें।
- बाहर से आने वाला सीधे बुजुर्गों और रोगियों से न मिले।
- सार्वजनिक स्थानों पर न जाएं, वहां कोई चीज न छुएं।
- बेवजह मेहमानों को न बुलाएं, पार्टी न करें।