फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोई कोरोना योद्धाओं की बहादुरी को रंगों से उकेर रहा, कोई कोरोना गीत लिख लोगों को कर रहा जागरूक

Wed, 15 Apr 2020 12:51 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
लायवा नूर ने रंगों से उकेरी कोरोना योद्धाओं की बहादुरी - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
इस समय पूरा देश कोरोना से जंग लड़ रहा है। कुछ लोग अपने घरों में रहकर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। हम आपको ऐसे ही कुछ कोरोना योद्धाओं के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपने तरीके से इस जंग में देश को हर दिन के साथ जीत की ओर ले जा रहे हैं।
विज्ञापन


बच्ची ने रंगों में उकेरी कोरोना योद्धाओं की बहादुरी राजपुर (कानपुर देहात)। लॉकडाउन के चलते स्कूल बंद हैं, लेकिन छात्र छात्राएं खाली समय में घर में ही अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। सिकंदरा के गांधी नगर निवासी वली मोहम्मद की बेटी लायवा नूर कस्बा के मदरसा निजामियां पब्लिक स्कूल में कक्षा छह की छात्रा है। लॉकडाउन के दौरान छात्रा ने खाली समय में कोरोना की जंग लड़ रहे डाक्टर, पुलिस, सफाई कर्मी के कर्तव्यों को दर्शाता हुआ एक कार्टून बनाया है


 
विज्ञापन

परमेश्वरी दयाल, सफाई कर्मचारी, पनवाड़ी (महोबा) एवं राजकुमारी, सफाईकर्मी, चरखारी (महोबा) - फोटो : amar ujala
कोरोना के खौफ से जहां आम आदमी सड़क पर निकलने से डर रहा है, वहीं शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी उठाए सफाईकर्मी जी जान से लगे हैं। ऐसे दौर में उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी को दूसरी पंक्ति में रख दिया है। तभी तो परिवार व खुद को भूखा रख राजकुमारी सुबह पांच बजे ही सफाई को निकल पड़ती हैं। आम दिनों में वह आठ से नौ बजे तक काम पर जाती हैं।

वह कहती हैं कि लॉकडाउन से पहले पति और बेटे के लिए नाश्ता बनाकर काम पर जाती थी लेकिन अब न खुद खाती हूं न ही पति व बेटे का नाश्ता बनाती हूं। पहले कर्म फिर पेट पूजा। पहले रोज आठ घंटे की ड्यूटी करती थी, लेकिन अब 12 घंटे की कर रही हूं। ऐसे संकट काल में मैं देश के काम आऊं तो इससे बड़ी बात क्या होगी। अब सफाई के प्रति लोगों का नजरिया भी बदल गया है।

इस लॉकडाउन में घरों में रह रहे लोगों को कुछ अच्छा सुना रहे पनवाड़ी के परमेश्वरी दयाल की पहल है कि लोग कोरोना के प्रति जागरूक हों। तभी तो उन्होंने कोरोना पर ही कुछ पंक्तियां लिख डालीं, जिसे वह मोहल्ले-मोहल्ले सुनाते फिरते हैं।

उनकी पंक्तियां हैं....कोरोना दूर भगाने रे, घर से नहीं जाने रे भारत पर संकट है भारी, धीमी बीमारी है भारी परमेश्वर को इस समय मोहल्लों को सैनीटाइज करने की जिम्मेदारी मिली है। वह जिस गली में जाते हैं वह यही गाना गाते हैं, ताकि लोग जागरूक हो सकें। वह कहते हैं कि मेरी ओर से एक छोटी सी पहल है ताकि लोग जागरूक हों।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें