चित्रकूट में 14 मई को गुजरात से लौटे श्रमिक की मौत के बाद सोमवार को अंतिम संस्कार के वक्त पहुंची प्रशासनिक टीम ने जलती चिता की आग बुझाकर मृतक का कोरोना जांच को सैंपल लिया। श्रमिक को कुछ दिनों से बुखार आ रहा था। सोमवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे जिला अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में उसकी मौत हो गई।
ग्रामीणों ने कोरोना की आशंका में इसकी सूचना प्रशासन को दी थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मृतक के परिजनों व अंतिम संस्कार में आए सभी लोगों के सैंपल भी लिए हैं। अगरहुंडा के उड़की मापी गांव निवासी युवक सूरत में साड़ी की फैक्टरी में काम करता था।
14 मई को वह चचेरे भाई व 10 ग्रामीणों के साथ श्रमिक ट्रेन से बांदा आया था। वहां से बस में चित्रकूट पहुंचा। सभी को गांव के ही एक विद्यालय में क्वारंटीन किया गया था। बाद में उन्हें विद्यालय से हटाकर बगीचे में क्वारंटीन कर दिया गया था। रविवार को युवक की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे जानकीकुंड चिकित्सालय ले गए।