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कोरोना से बचाव के लिए सेनिटाइजर का इस्तेमाल जायज

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कानपुर। कोरोना से बचाव के लिए हाथ साफ करने के वास्ते इस्तेमाल किए जाने वाले हैंड सैनिटाइजर की पाकी और नापाकी को लेकर उलमा में मतभेद हैं। लेकिन कोरोना से हिफाजत की जरूरत पर वे इसकी इजाजत दे रहे हैं। उलमा का एक वर्ग सैनिटाइजर मेंअल्कोहल होने की वजह से इसकी इजाजत तो देता है लेकिन इसे नापाक भी मानता है। उनका कहना है कि बेहतर है कि सैनिटाइजर की जगह साबुन आदि का इस्तेमाल किया जाए लेकिन जब बतौर दवा और रोग के बचाव के साधन का मामला हो तो इस्तेमाल किया जा सकता है।
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बरेली की दरगाह आला हजरत से जुड़े एक मुफ्ती के बयान कि सैनिटाइजर इस्तेमाल करना नापाक है, के बाद चर्चा गर्म हो गई है। इस संबंध में मदरसा अहसनुल मदारिस कदीम नई सड़क के दारुल इफ्ता के सदर मुफ्ती मो. हनीफ बरकाती का कहना है कि बेहतर है कि सैनिटाइजर का विकल्प इस्तेमाल किया जाए। वैसे अल्कोहल नापाक है। लेकिन जब हुकूमत की गाइडलाइन हो और इसे बतौर दवा बीमारी से बचाव के लिए इस्तेमाल करने की जरूरत हो तो किया जा सकता है।
जमीअत उलमा के प्रदेश अध्यक्ष शहर काजी मौलाना मो. मतीनुल हक ओसामा का कहना है कि अंगूर सड़ा कर तैयार किया गया अल्होकल जो बतौर शराब इस्तेमाल होता है, वह हराम है। लेकिन सैनिटाइजर में केमिकल इस्तेमाल होते हैं। यह हराम नहीं है और न ही नापाक है। यह दवा की शक्ल में इस्तेमाल होता है। इससे हैंड वॉश के अलावा मस्जिद भी सैनिटाइजर की जा सकती है।
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