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कोरोना मृत्यु दर रोकने को पहले कंट्रोल करेंगे निमोनिया, लेवल वन में ही प्लाज्मा-रेमडेसिविर तकनीक का इस्तेमाल

Tue, 15 Sep 2020 04:21 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कोरोना से मौत - फोटो : PTI
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कानपुर में कोरोना के इलाज में विशेषज्ञों को अभी तक सबसे कारगर तकनीक प्लाज्मा और रेमडेसिविर थेरेपी ही लगी है। लेकिन फेफड़ों पर निमोनिया छा जाने के बाद इनका कोई फायदा नहीं मिलता। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ने संक्रमित रोगी में निमोनिया बढ़ने से पहले ये दोनों थेरेपी देने की तरकीब निकाली है।
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इससे रोग नियंत्रण में आ जाएगा और मृत्यु दर भी घटेगी। 10 मरीजों पर रेमडेसिविर थेरेपी के सफल परीक्षण के बाद मेडिकल कॉलेज लेवल वन के अन्य रोगियों पर इसे आजमाने का निर्णय लिया है। अब तक डेथ ऑडिट में यह साबित हो गया है कि कोरोना के गंभीर हो जाने पर उक्त दोनों थेरेेपी कोई काम नहीं आई और मरीजों की मौत हो गई।

हैलट और लेवल थ्री के अस्पतालों में ऐसा ही देखने को मिला है लेकिन शुरुआती संक्रमण में ये थेरेपी संजीवनी साबित हुई है। हैलट में 10 रोगियों पर रेमडेसिविर थेरेपी का परीक्षण किया गया। इनकी कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आते ही जब फेफड़ों की जांच कराई गई तो निमोनिया के हल्के बिंदु दिखे। उस वक्त जब रेमडेसिविर दी गई तो निमोनिया नहीं बढ़ा और सात दिन में रिपोर्ट निगेटिव हो गई।
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यही रिजल्ट प्लाज्मा थेरेपी के रोगियों में आया। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) आरबी कमल का कहना है कि अब यही रणनीति अपनाई जा रही है। लेवल वन में ही रोगियों को ठीक करेंगे जिससे वे लेवल थ्री में न पहुंचें। होता यह है कि रोगी लेवल वन की वजह से चला जाता है और बाद में गंभीर होकर आता है। तब दवाओं का उतना असर नहीं आ पाता।
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कोरोना रोगियों की मौत के प्रमुख कारण

-समय से इलाज शुरू न होना  
-रोग छिपाए रखना, गंभीर होने पर अस्पताल आना
-ऑक्सीजन सेच्युरेशन 90 फीसदी के नीचे आने पर भर्ती होना
-डायबिटीज, हाइपरटेंशन, दमा नियंत्रित न रखना
-बिगड़ी लाइफ स्टाइल, नशेबाजी से इम्युनिटी सिस्टम लो होना
-कोमॉर्बिड रोगियों के बचाव के तरीके न अपनाना
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