फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हैलट: एक दिन का ही पीपीई किट स्टॉक बचा

विज्ञापन
विज्ञापन
कोरोना मरीजों का इलाज करने वाले शहर के सबसे बड़े अस्पताल हैलट में पीपीई (पर्सलन प्रोटेक्शन इक्विपमेंट) किट का एक दिन का ही स्टॉक बचा है। इस बीच यदि उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन ने पीपीई किट नहीं भेजी तो कोरोना मरीजों का इलाज प्रभावित हो सकता है। उर्सला में पीपीई किट की कमी से इमरजेंसी तक में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ सिर्फ मास्क, गलव्स पहनकर इलाज करने को मजबूर हैं। डफरिन, कांशीराम आदि अस्पतालों में भी पीपीई किट की किल्लत है।
विज्ञापन

हैलट स्थित मैटरनिटी विंग में बने कोविड-19 वार्ड एवं 24 घंटे चल रही फ्लू ओपीडी में रोज 60 पीपीई किट खर्च हो रही हैं। इसी अस्पताल के न्यूरोसाइंस स्थित दूसरे कोविड-19 वार्ड में रोज 40 और इमरजेंसी में 15 पीपीई किट लगती है। हैलट से संबद्ध अपर इंडिया शुगर एक्सचेंज जच्चा बच्चा अस्पताल, बाल रोग चिकित्सालय, मुरारीलाल चेस्ट अस्पताल और संक्रामक रोग चिकित्सालय में भी प्रतिदिन 40 से 50 पीपीई किट की जरूरत है, लेकिन नहीं मिल पा रही।
उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन से अप्रैल के आखिर में 10000 पीपीई किट की मांग की गई थी, पर कॉरपोरेशन ने एक मई को केवल 400 पीपीई किट ही भेजी। अब यह खत्म होने की स्थिति में हैं। अस्पताल सूत्रों के अनुसार एक दिन का ही स्टाक बचा है।
विज्ञापन

उधर, कोविड-19 वार्ड में काम कर रहे पैरामेडिकल स्टाफ सहित अन्य कर्मचारियों ने जरूरत से कम किट देने का आरोप लगाया है। अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके मौर्या ने पीपीई किट की किल्लत स्वीकार की। बताया कि उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन को 10000 किट की डिमांड भेजी गई है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के पास भी 1365 किट ही बची हैं। यहां से सैंपल कलेक्शन में जाने वालीं टीमों, कांशीराम, उर्सला, डफरिन और सरसौल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए किट उपलब्ध कराई जाती है।
डफरिन में रोज औसतन 30 पीपीई किट खर्च हो रही है। अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर वीबी सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमण की वजह से सभी डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को पीपी किट उपलब्ध होनी चाहिए। लेकिन किल्लत की वजह से यह संभव नहीं हो पा रहा है। सीएमओ से किट मांगी गई हैं।
उर्सला में मात्र 40 पीपीई किट बची है। इससे इमरजेंसी में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। इसी तरह कांशीराम अस्पताल में सीएमओ की तरफ से पर्याप्त पीपीई किट न मिलने से मुख्य चिकित्सा अधीक्षक अपने स्तर से व्यवस्था कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें