कोरोना के चलते लॉकडाउन से मौसम में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बार वातावरण में प्रदूषण के कणों की मात्रा पूरी तरह समाप्त हो जाने से अप्रैल माह तक उमस महसूस नहीं की गई। ऐसा गर्मी के मौसम में पहली बार हुआ है।
वातावरण में मौजूद नमी प्रदूषित कणों से मिलकर एक परत के रूप में जमा हो जाती है। जिससे जमीन की ऊर्जा आसमान में जाने के बजाय जमीन से करीब तीन किलोमीटर ऊपर ही जमा रहती है। इससे वातावरण में उमस जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। लेकिन इस बार वातावरण में प्रदूषण की मात्रा पिछले करीब एक महीने से पूरी तरह खत्म है। यही वजह है कि अभी तक लोगों को उमस भरी गर्मी नहीं सता पाई है।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) स्थित मौसम इकाई के अनुसार वर्ष 2017, 2018 एवं 2019 की तुलना में इस वर्ष अप्रैल महीने में न्यूनतम तापमान में करीब पांच डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2017 के अप्रैल महीने में सबसे न्यूनतम तापमान 16.6 डिग्री सेल्सियस, 2018 में 18.6 डिग्री सेल्सियस व वर्ष 2019 के अप्रैल में सबसे न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ था। जबकि इस बार 2020 के अप्रैल महीने में सबसे न्यूनतम तापमान 13.8 डिग्री सेल्सियस रहा। इसकी वजह यह है कि प्रदूषण मुक्त वातावरण में जमीन से उठने वाली ऊर्जा आसानी से ऊपर निकल जा रही है। जिससे जमीन का वातावरण ठंडा महसूस रहा है। स्थानीय मौसम विभाग के निदेशक डॉ. नौशाद खान ने बताया कि प्रदूषण न होने की वजह से दिन के समय सूर्य की किरणें सीधे जमीन पर आ रही हैं। इससे धूप तो तेज हो रही है लेकिन नमी और प्रदूषण के बीच कोई संबंध नहीं होने से उमस भरी गर्मी नहीं पड़ रही है। यही वजह है कि वातावरण काफी अच्छा और हल्का महसूस हो रहा है।