हाल में हुई दो कोमॉर्बिड रोगियों की मौत और सोमवार को एक साथ 33 नए मामले मिलने के बाद कोरोना के बढ़ते संक्रमण से नगर के सवा लाख कोमॉर्बिड रोगियों के लिए खतरे के संकेत हैं। अभी तक कोरोना से जितने रोगियों की मौत हुई है, उनमें 80 फीसदी कोमॉर्बिड रहे हैं। वे पुराने किसी मर्ज के शिकंजे में थे।
कोरोना संक्रमण ने पुराने रोग की जटिलताएं बढ़ा दीं और रोगी की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर दिया जिससे रोगी संभल नहीं पाया और उस की मौत हो गई। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की डेथ ऑडिट कमेटी ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी है। स्वास्थ्य विभाग ने इन रोगियों के लिए अलर्ट जारी किया है। ये रोगी बूस्टर डोज लगवाने के साथ ही संक्रमण से बचाव के लिए खास एहतियात बरतें।
तीन दिन के अंदर कोरोना से दो रोगियों की मौत हुई है। इन दोनों मौतों का ऑडिट हो गया है। एक रोगी में आंतों का कैंसर रहा है और दूसरे को लिवर सिरोसिस। कैंसर, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, गुर्दा प्रत्यारोपण, दमा, एचआईवी संक्रमण, लिवर रोग आदि के सवा लाख रोगी शहर में है। स्वास्थ्य विभाग के सर्वे और अस्पतालों की ओपीडी और इंडोर में आए रोगियों के आधार पर यह आकलन किया गया। इन रोगियों की निगरानी करने और तबीयत बिगड़ने पर इन्हें होम आइसोलेशन के बजाय अस्पताल में भर्ती कराने के भी शासन के निर्देश हैं।
अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. जीके मिश्रा का कहना है कि कोमॉर्बिड रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इससे कोविड संक्रमण से दिक्कत हो जाती है। डेथ ऑडिट कमेटी के अध्यक्ष डॉ. एसके गौतम ने बताया कि 80 फीसदी केस कोमॉर्बिड रहे हैं।