कानपुर: सरयू नारायण बाल विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में शनिवार से शुरू हुए 11वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में लगी कांग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की किताब ‘मैं हिंदू क्यों हूं’ पर विवाद खड़ा हो गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने इस किताब को मेले से हटाने के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिबंधित करने की मांग शुरू कर दी है। किताब में थरूर ने विनायक दामोदर सावरकर को ‘बागी पुत्र’ बताया है। लिखा है कि अंडमान की जेल में बंद रहने के दौरान सावरकर ने खुद की रिहाई के लिए अंग्रेजों से लिखित माफी मांगी थी।
थरूर ने पत्र का अंश भी अपनी पुस्तक में लिखा है। बताया है कि सावरकर ने पहले 1911 में और दूसरी बार 14 नवंबर 1913 को एक पत्र लिखकर खुद को रिहा करने के लिए प्रार्थना की है और इसके एवज में अंग्रेजी सरकार के प्रति वफादार होने के लिए कहा था।
दोषी ठहराते हुए लिखा है- उनके नेतृत्व वाली सरकार में करीब दो हजार निर्दोष मुस्लिमों की हत्या कर दी गई
थरूर ने इस पुस्तक में हिंदूवाद बनाम हिंदुत्व की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सांप्रदायिक बताया है। देश में दंगा भड़काने का दोषी ठहराया है। 2002 के दंगा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तब गुजरात के मुख्यमंत्री) को दोषी ठहराते हुए लिखा है कि उनके नेतृत्व वाली सरकार में ही करीब दो हजार निर्दोष मुस्लिमों की हत्या कर दी गई थी।
आगे लिखा है कि नरेंद्र मोदी ने इस दंगे के आरोपियों को संरक्षण देने का काम भी किया। एबीवीपी के प्रांत अध्यक्ष डॉ. अनूप सिंह ने कहा कि हिंदुत्व अस्मिता का विषय है। इसमें करोड़ों देशवासियों की आस्था है। ऐसे में थरूर कि यह किताब न केवल समाज में वैचारिक प्रदूषण फैलाने का कार्य कर रही है बल्कि लोगों को गलत इतिहास भी पढ़ने को मजबूर कर रही है। वीर सावरकर ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। ऐसे व्यक्ति के लिए इस तरह के शब्दों का प्रयोग करना अपराध है।
पुस्तक को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित करने की मांग
डॉ. अनूप सिंह ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस पुस्तक को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया जाए। इसके अलावा उन्होंने सोमवार को एबीवीपी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ पुस्तक मेले में जाने का फैसला लिया है। कहा कि आयोजकों से इस मुद्दे पर बात करके पुस्तक को मेले से हटवाएंगे।
प्रकाशकों को ध्यान रखना चाहिए
डॉ. अनूप ने कहा कि जब भी कोई किताब प्रकाशित होती है तो सबसे ज्यादा प्रकाशक की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में थरूर की इस किताब के लिए वाणी प्रकाशक की भी जिम्मेदारी है। उन्हें ऐसी तथ्यहीन किताब को नहीं प्रकाशित करना चाहिए था।