कानपुर। नगर निगम के ठेकेदार सिंडिकेट की जांच सीडीओ के नेतृत्व में गठित समिति ने सोमवार से शुरू कर दी है। पहले चरण में दो साल में हुए टेंडर, कार्यों की धरातल पर स्थिति और भुगतान के साथ पंजीकरण प्रक्रिया की जांच की जा रही है। उसके बाद नगर निगम कर्मियों की सांठगांठ की परतें खोली जाएंगी। समिति 10 कार्य दिवस में अपनी रिपोर्ट देगी।
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने पांच फर्माें को ब्लैकलिस्ट करते हुए तीन ठेकेदारों पर एफआईआर दर्ज कराई है। दो गिरफ्तार हैं जबकि सिंडिकेट का सरगना गोविंद शर्मा अभी तक फरार है। गुरुवार को मंडलायुक्त कार्यालय में हुई बैठक के बाद मुख्य विकास अधिकारी सीडीओ अनुभव जे जैन के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है। सोमवार को समिति की बैठक सीडीओ कार्यालय में हुई। इसमें नगर निगम अभियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता सहित अन्य अधिकारियों को बुलाकर जानकारी ली गई। इसके बाद सीडीओ ने समिति में शामिल दो सदस्यों लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता अनिल पांडेय को जांच की रूपरेखा बताई। कहा कि पहले चरण में नगर निगम में फर्मों के पंजीकरण की प्रक्रिया की जांच होगी। दूसरे चरण में यह देखा जाएगा कि टेंडर में जो बड़े कार्य हुए उनकी धरातल पर स्थिति क्या है। तीसरे चरण में रैंडम चेकिंग होगी और भुगतान संबंधी जानकारी भी जुटाई जाएगी। कार्यों की गुणवत्ता की भी जांच होगी। 10 कार्य दिवस में टीम अपनी जांच कर रिपोर्ट देगी जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
शासन को लिखा था पत्र
अपने विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों की जांच के लिए नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने बुधवार को शासन को भी एक पत्र भेजा था। इसमें उन्होंने कहा था कि एक मुख्य अभियंता स्तर का अधिकारी दिया जाए जो नगर निगम के कर्मियों, अधिकारियों की निष्पक्ष जांच कर सके क्योंकि वर्तमान कर्मियों के रहते जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसे लेकर बृहस्पतिवार को नगर निगम मुख्यालय में हलचल रही।
एसआईटी लौटी
सोमवार को एसआईटी की टीम जांच करने मोतीझील स्थित नगर निगम मुख्यालय पहुंची लेकिन सीडीओ कार्यालय में बैठक के लिए बुलाए जाने से कोई अधिकारी नहीं मिला। इस पर टीम लौट गई। टीम करीब 15 मिनट तक अभियंत्रण विभाग में रही और कॉल कर विभाग के अधिकारियों से बात की। इसके बाद वापस लौट गई।