कन्नौज। उपखंड कार्यालय के निकट शनिवार को फाल्ट सुधारते समय संविदा लाइनमैन करंट की चपेट में आ गया। सहकर्मी उसे जिला अस्पताल ले गए। वहां से गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज तिर्वा रेफर किया गया,जहां इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना से परिजनों में चीख-पुकार मच गई। निगम के अधिकारियों द्वारा लिखित आश्वासन मिलने के बाद परिजन पंचनामा भराने को तैयार हुए। तब शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
सदर कोतवाली क्षेत्र के सरायशाह मोहम्मद गांव निवासी संविदा कर्मचारी दिलीप कुमार (36) सुबह सात बजे मोहल्ला अकबरपुर सरायघाघ महिला थाना के निकट उपखंड कार्यालय के पास हाईटेंशन लाइन में फाल्ट दुरुस्त कर रहे थे। आरोप है कि लिखित में शटडाउन लेने के बाद भी अचानक लाइन चालू हो गई और वह करंट की चपेट में आ गए। सहकर्मी उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां से राजकीय मेडिकल कॉलेज तिर्वा रेफर कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई।
घटना की सूचना पर परिजन व अन्य लोग मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। परिजनाें ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर पुलिस व निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे। निगम के अधिकारियाें ने 10 लाख रुपये मुआवजा, मानदेय की 90 प्रतिशत पेंशन व अन्य विभागीय लाभ दिए जाने का लिखित आश्वासन दिया। तब परिजन माने और शव का पंचनामा भरने दिया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना से पत्नी मधू व छह साल की पुत्री चारू का रो-रोकर बुरा हो रहा है।
कन्नौज डिवीजन के अधिशासी अभियंता मगन सिंह विभागीय जांच में यह सामने आया है कि संविदा लाइनमैन ने चौधरी सराय फीडर का शटडाउन लिया था और उससे 20 मीटर दूर कन्नौज सिटी लाइन पर चढ़ गया, जो चालू थी। विभागीय नियमानुसार पीड़ित परिवार को दस10 लाख रुपये का मुआवजा दिलाया जाएगा।
काम का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा भारी
तिर्वा। घटना के बाद उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन निविदा संविदा कर्मचारी संघ लखनऊ के प्रदेश उपाध्यक्ष रमेश राजपूत मेडिकल कॉलेज तिर्वा पहुंचे। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में कर्मचारियों की छंटनी से काफी दिक्कताें का सामना करना पड़ रहा है। कहा कि जिले में 35 बिजली घर हैं, जिन पर मात्र 424 कर्मचारी हैं, जबकि पहले 875 कर्मचारी थे। काम का अतिरिक्त बोझ व निगम द्वारा सभी कर्मचारियों को सुरक्षा किट मुहैया नहीं कराने के चलते हादसा हुआ है। एक साल में छह से अधिक संविदा कर्मचारी घटनाओं का शिकार हो चुके हैं, इसके बाद भी निगम की आंख नहीं खुल पा रही है।