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ये बंटवारा नहीं बराबर का, अभी से सपा पर दबाव बनाने की जुगाड़ में लगी कांग्रेस

Thu, 02 Feb 2017 10:57 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर

सार

- कांग्रेस को मिली सीटों से प्रत्याशी नहीं हटा रही थी सपा
- तीन तक कांग्रेस और सपा के कुछ प्रत्याशी नाम वापस लेंगे
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विस्तार
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यूपी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन तो हो गया लेकिन दोनों दल अपने वर्चस्व को मजबूत रखने के जुगाड़ तलाश रहे हैं। नामांकन के आखिरी दिन कांग्रेस की तरफ से सपा प्रत्याशियों के सामने कई सीटों पर उतारे गए प्रत्याशियों की वजह अखिलेश यादव और उनकी पार्टी पर दबाव बनाना बताया जा रहा है। पता चला है कि कांग्रेस के खाते में जो सीटें बंटवारे में दी गई थीं, सपा उन पर घोषित प्रत्याशियों को नहीं हटा रही थी। इसी वजह से कांग्रेस ने आनन-फानन में यह फै सला लिया।
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दोनों पार्टियों में असमंजस

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इस दबाव का नतीजा यह हुआ है कि दोनों पार्टियों में असमंजस पैदा हो गया है। ऐसी स्थिति में तीन फरवरी की शाम को नामांकन वापसी का समय पूरा होने के बाद दोनों पार्टियों के बीच की स्थिति साफ होगी। फिलहाल इस मसले पर दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं को भी पता नहीं है कि किसकी सीट रहेगी, किसकी जाएगी। गोविंदनगर सीट पर सपा प्रत्याशी का पर्चा खारिज होने की वजह से वहां पर स्थिति कांग्रेस के खाते में चली गई है।

 

सपा और कांग्रेस का बंटवारा नहीं बराबर का

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बंटवारे में भी यह सीट कांग्रेस के पास ही थी। अब कांग्रेस के हिस्से वाली दो और दो अन्य सीटों पर कांग्रेस और सपा दोनों के प्रत्याशी काबिज है। इसमें सिर्फ घाटमपुर ऐसी सीट हैं, जहां पर केवल कांग्रेस का ही प्रत्याशी है। यह सीट भी बंटवारे में कांग्रेस को ही मिली है। नामांकन वापसी की शाम किन सीटों से किस पार्टी के प्रत्याशी हटेंगे यह अभी तय नहीं है, इतना जरूर है कि भोगनीपुर और महाराजपुर सीट से जो भी हटेगा वह चर्चा का विषय बनेगा।
 
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कांग्रेस ने जो बाद में प्रत्याशी उतारे वह सिर्फ दबाव बनाने की वजह से

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भोगनीपुर सीट पर सपा के निवर्तमान विधायक योगेंद्र पाल यादव हैं तो कांग्रेस के देहात इकाई जिलाध्यक्ष। इसी तरह महाराजपुर सीट से सपा की पूर्व विधायक अरुणा तोमर मैदान में हैं तो कांग्रेस से पूर्व सांसद राजाराम पाल। पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने जो बाद में प्रत्याशी उतारे वह सिर्फ दबाव बनाने की वजह से। इतना जरूर है कि जो सीटें कांग्रेस को बंटवारे में दी गई है, उसमें अदला बदली भी हो सकती है। या फिर एकाध सीट बढ़ भी सकती है।
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