रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) कानपुर में आयोजित प्रेसवार्ता में संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. अशोक रंजन ने बताया कि यहां सेंसर सिस्टम विकसित करने का काम तेजी से किया जा रहा है। सरकार भी इसे बढ़ावा दे रही है। इसके 47 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। यह प्रोजेक्ट जोधपुर और मुंबई डीएमएसआरडीई के सहयोग से शुरू किया गया है। इसमें कानपुर के हिस्से में 24 करोड़ का बजट आवंटित किया गया। इसके तहत ऐसा आवरण या लेप तैयार किया जाएगा जिसको यदि किसी हवाई जहाज या लड़ाकू विमान पर लगा दिया जाएगा तो उसे इलेक्ट्रो मैग्नेटिक किरणें भी पकड़ नहीं पाएंगी। इन किरणों का इस्तेमाल रडार में किया जाता है। इसके मायने यह है कि रडार भी लड़ाकू विमान को पकड़ नहीं पाएंगे। इस पर तेजी से काम किया जा रहा है।
राकेट इंजन में भी रहेंगे ठंडे
वैज्ञानिक अशोक रंजन ने बताया कि संस्थान को फरवरी में एक नया प्रोजेक्ट मिला है। इसके तहत सिलीकॉन कारबाइड फाइबर तैयार किया जाना है। यह ऐसा फाइबर है। जिसको 2000-3000 डिग्री सेल्सियस तापमान पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसका इस्तेमाल अंतरिक्ष जाने वाले राकेट या यान में किया जाता है। यह फाइबर यान के धरती से ऊपर जाने के दौरान उपयोग में रहता है वह भी महज तीन मिनट के लिए। क्योंकि जैसे ही यान ऊपर जाता है तापमान 2000-3000 डिग्री सेल्सियस के स्तर पर पहुंच जाता है। लेकिन इसके बाद तापमान कम होने लगता है। ऐसे में यह फाइबर यान और उसमे बैठे यात्री को सुरक्षित रखेगा। इस प्रोजेक्ट को पूरे होने में 2-3 साल का समय लगेगा।
लापता विमान भी झट से खोज लिया जाएगा
संस्थान ने हवाई जहाज और लड़ाकू विमानों में लगाया जाने वाला बहुउद्देशीय ब्लैक बाक्स बनाया है। यह अब तक के बने ब्लैक बॉक्स से बेहद हल्का है। इसका वजन करीब 1.5 किलोग्राम है जबकि अन्य ब्लैक बाक्स 2-3 किलो ग्राम तक के होते हैं। इस पर ऐसा आवरण लगाया गया है जो किसी भी स्थिति में विमान के होने की जानकारी उपलब्ध करा देगा। एयरफोर्स ने इसके कई ट्रायल किए हैं जो सफल रहे हैं। बताया गया कि इस बाक्स का ट्रायल 1100 डिग्री सेल्सियस पर, विमान के क्रैश होने की स्थिति पर, विमान के समुद्र में गिरने की स्थिति में किया जा चुका है। इसके अलावा जब यान जल जाता है उस दौरान करीब 250-300 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी इसका ट्रायल किया जा चुका है। जिस पर यह खरा उतरा है।
डिफेंस कॉरीडोर से बढ़ेगा रक्षा उत्पादन
संस्थान के कार्यकारी निदेशक एसबी यादव और वैज्ञानिक डा. अशोक रंजन ने प्रदेश में प्रस्तावित डिफेंस कॉरिडोर को वर्तमान और भविष्य की जरूरत बताया। उनके मुताबिक कॉरिडोर ॉबनने से देश रक्षा-प्रतिरक्षा उत्पादों का बहुत बड़ा हब बन सकेगा। रिसर्च, तकनीक को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा जिसकी मौजूदा समय में सबसे अधिक आवश्यकता है। बताया गया कि देश में अभी 60 फीसदी सैन्य सामान विदेशों से मंगाया जाता है। ऐसे कॉरिडोर होने से बहुत बड़ा आर्थिक लाभ देश को होगा। नई-नई नकनीक आएगी। इससे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद तैयार कि ए जा सकेंगे।
इनकी लगेगी प्रदर्शनी
टेक्नोलॉजी डे पर 11 मई शुक्रवार को डीएमएसआरडीई में प्रदर्शनी लगाई जाएगी। सुबह 8:30 बजे से 12:30 तक प्रदर्शनी लगेगी। इसमें कोई भी व्यक्ति शामिल हो सकता है। उसे अपने साथ कोई पहचान प्रमाण पत्र लाना होगा। मीडिया प्रभारी राजेश जैस ने बताया कि 20 स्कूलों के 600 बच्चों को भी प्रदर्शनी देखने के लिए बुलाया गया है। प्रदर्शनी में बुलेट प्रूफ जैकेट, हेलमेट, एंटी माइन बूट, वाटर फिल्टर, लड़ाकू विमानों में लगने वाली रबर सीलें, विमानों में लगने वाले पेंट आदि का प्रदर्शन किया जाएगा।