कानपुर। केंद्र सरकार ने नए आयकर अधिनियम का मसौदा पुराने कानून की जटिलता और भारी-भरकम भाषा को हटाकर आम करदाता के लिए आसान और स्पष्ट रूप में तैयार किया है। अब स्कूल और अस्पतालों को मिलने वाली छूट तालिका में लिखी जाएगी। 800 धाराओं को घटाकर 536 किया गया है। इससे कर की गणना आसान हो सकेगी और विवाद कम होंगे। आयकर में मिलने वाली छूट़ों में भी बदलाव किया गया है। इसके नियमों को कम किया गया है। अब इन्हें छह स्कीमों में बांटा गया है। तालिका फार्म में बनाया गया है। इससे करदाता तुरंत देख पाएंगे कि उनकी आय और उनकी श्रेणी के अनुसार कौन-कौन सी छूट उपलब्ध है। शहर में 10 लाख से ज्यादा आयकरदाता हैं।
कानपुर इनकम टैक्स बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री राजीव कुमार गुप्ता और कानपुर चार्टर्ड अकाउंटेंट सीपीई स्टडी सर्किल के संयोजक सीए प्रशांत रस्तोगी ने बताया कि कि निर्धारण वर्ष और पूर्व साल जैसे दोहरे शब्दों की जगह कर वर्ष का इस्तेमाल शुरू किया गया है। जो सीधे वित्तीय वर्ष (अप्रैल से मार्च) के बराबर होगा। अब पंजीकृत नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन शब्द का इस्तेमाल किया गया है ताकि ट्रस्ट, सोसाइटी या संस्था जैसी अलग-अलग शब्दावली से होने वाला भ्रम खत्म हो। धार्मिक ट्रस्टों के लिए अनाम दान पर टैक्स छूट का प्रावधान किया गया है जो पहले उपलब्ध नहीं था। इससे चैरिटी संस्थाओं के लिए काम करना आसान होगा। स्कूल और अस्पतालों को मिलने वाली छूट अब साफ-सुथरे तालिका रूप में लिखी गई है। मेडिकल खर्चों के लिए प्रमाणपत्र लगाने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। घर से आय पर भी करदाताओं के लिए बड़ी राहत है। पुराने कानून में अगर करदाता के पास एक खाली मकान है तो उस पर काल्पनिक किराये का टैक्स देना पड़ता था। नए कानून में यह टैक्स पूरी तरह हटा दिया गया है। अब केवल किराए पर दिए गए मकान पर ही टैक्स लगेगा।
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फाइनल रिटर्न में नहीं हो पाएगा अब सुधार
कानपुर। मर्चेंट चैंबर ऑफ उप्र की जीएसटी कमेटी के चेयरमैन संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि जीएसटीएन पोर्टल के अनुसार जुलाई 2025 के जीएसटी रिटर्नों के मामले में जीएसटीआर 3बी में प्रदर्शित हो रही आउटवर्ड लायबिलिटी की राशि अब संशोधित नहीं की जा सकेगी। अभी तक जीएसटीआर 3बी में ऑटो-पॉपुलेटिड डाटा संशोधित किया जा सकता था। इस कारण यदि कोई त्रुटि या गलत आंकड़े प्रदर्शित होते थे तब कारोबारी उसे अपने जीएसटी के फाइनल रिटर्न में संशोधित कर सुधार कर लेता था। अब ऐसा नहीं हो पाएगा। कारोबारियों एवं सेवाप्रदाताओं को जीएसटीआर एक भरते समय सावधानी बरतनी होगी। डाटा को संशोधित करने के लिए अब जीएसटीआर एकए में संशोधन कर अपलोड किया जा सकता है। तब यह संशोधित डाटा ही जीएसटीआर तीन बी में प्रदर्शित होगा। इसे टैक्स अवधि समाप्त होने के अगले महीने की 20 तारीख से पूर्व ही संशोधित करना होगा।