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Kanpur News: पिछड़ा वर्ग आरक्षण पर आयोग ने टटोली जमीनी हकीकत

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कानपुर। स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण की वास्तविक स्थिति परखने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की टीम शहर पहुंची। सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में हुई बैठक में ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य और प्रधानों के साथ करीब दो घंटे तक मंथन किया। जिले की 590 ग्राम पंचायतों में पिछड़े वर्ग की आबादी, राजनीतिक भागीदारी, सामाजिक स्थिति और आरक्षण की जरूरत को लेकर जमीनी फीडबैक लिया। यह भी जाना कि निकायों में पिछड़े वर्ग को वास्तविक प्रतिनिधित्व कितना मिल रहा है और आरक्षण का लाभ जरूरतमंद तबकों तक किस हद तक पहुंच रहा है।
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बैठक में आयोग के सदस्यों ने ग्राम पंचायतवार पिछड़े वर्ग की अनुमानित आबादी और उसमें शामिल जातियों की जानकारी जुटाई। पूछा गया कि क्षेत्र में पिछड़े वर्ग की कौन-कौन सी जातियां हैं इनमें किसकी संख्या अधिक है और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कौन सा वर्ग आगे है। राजनीति में उनकी सीमित भागीदारी के कारण और स्थानीय निकायों में हिस्सेदारी बढ़ाने के उपाय भी पूछे गए। इस पर कई ब्लॉक प्रमुखों ने विचार रखे। आयोग ने पूछा कि क्या पिछड़े वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण की आवश्यकता है और मौजूदा व्यवस्था राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए पर्याप्त है या नहीं। इस पर दो ब्लॉक प्रमुख और प्रधानों ने आरक्षण खत्म करने की बात कही।

आयोग के सदस्यों ने बताया कि कानपुर 22वां जिला है जहां टीम जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों से फीडबैक ले रही है। सभी 75 जिलों की अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी। इसी के आधार पर स्थानीय निकाय चुनावों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं में पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर निर्णय की दिशा तय होगी। बैठक में सदस्य एसपी सिंह (सेवानिवृत्त आईएएस), ब्रजेश कुमार (सेवानिवृत्त डीजे), संतोष कुमार विश्वकर्मा (सेवानिवृत्त एडीजे) और अरविंद कुमार चौरसिया (सेवानिवृत्त आईएएस) रहे। मौके पर सीडीओ अभिनव जे जैन, एडीएम वित्त डॉ. विवेक चतुर्वेदी, डीडीओ आत्म प्रकाश रस्तोगी, डीपीआरओ मनोज कुमार समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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कल्याणपुर ब्लॉक में बैठक कर जानी परिवारों की स्थिति

इसके बाद सदस्यों ने विकासखंड कल्याणपुर में अधिकारियों व पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। यहां ग्राम पंचायतों में पिछड़े वर्ग की आबादी, जातिगत संरचना, राजनीतिक भागीदारी, आरक्षण की स्थिति और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों की जानकारी ली गई। प्रतिनिधियों से पूछा गया कि ग्राम पंचायतों में पिछड़े वर्ग के कितने परिवार पक्के मकान, शौचालय, पेयजल और अन्य सुविधाओं से वंचित हैं तथा सुधार के लिए किन प्रयासों की जरूरत है।
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