फंसने पर सिपाही को नेम प्लेट लगाने का आया ख्याल।
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कानपुर। वाणिज्यकर विभाग में सिपाहियों को आगे कर अवैध वसूली का खेल लंबे समय से चल रहा है। इसमें सिपाही जरूर मोहरा बनते हैं, लेकिन इसके पीछे अधिकारियों की शह रहती है। शह इस बात की कि वसूली करो और बचाने की जिम्मेदारी उनकी। इस काम को अंजाम देते हैं बिना वर्दी और बिना नेम प्लेट वाले सिपाही। इस खेल में वाणिज्यकर अफसर से लेकर जोन के आला अधिकारी तक शामिल रहते हैं। यही वजह है कि शिकायत और सबूत के बाद अफसर कार्रवाई नहीं करते।
‘अमर उजाला’ के पास वाणिज्यकर अफसरों और सिपाहियों की इस करतूत का पूरा वीडियो है। इसमें साफ है कि वसूली के लिए सिपाही अपनी नेम प्लेट निकालकर जेब में रख लेते हैं। किसी को संदेह या पकड़ने जाने की स्थिति में निकालकर फिर से लगा लेेते हैं। किदवई नगर में मंगलवार को बिना नेम प्लेट वाले सिपाहियों की अवैध वसूली का वीडियो आला अफसरों तक पहुंचने के बाद भी न तो जिम्मेदार अफसरों से पूछताछ हुई न सिपाहियों पर कार्रवाई।
ऐसा ही मसला एक माह पहले गुमटी नंबर पांच में हुआ था। वहां भी वाणिज्यकर अफसर बिना नेम प्लेट वाले सिपाहियों के साथ वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इस प्रकरण पर व्यापारियों को खूब हो हल्ला मचाया। विभागीय अफसरों के अलावा कमिश्नर मो. इफ्तिखारुद्दीन से भी शिकायत की। विभागीय अफसरों ने तो कार्रवाई नहीं की लेकिन कमिश्नर ने ऐसे सिपाहियों को पकड़कर बैठा लेने की बात कही थी। इससे पहले व्यापार बंधु की बैठक में व्यापारियों ने सिपाहियों की इस हरकत की शिकायत की थी, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।