कमीशनबाजी और अवैध धन उगाही से नाराज सेल्फ फाइनेंस कॉलेज के प्रबंधकों ने शुक्रवार को छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। यूनिवर्सिटी कैंपस के ही इंटरनेशनल गेस्ट हाउस में प्रबंधकों ने मीटिंग की और आरोप लगाया कि 45 दिन की परीक्षा के दौरान उड़नदस्तों ने 45 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की है।
यूनिवर्सिटी से संबद्ध 900 सेल्फ फाइनेंस कॉलेज हैं। हर कॉलेज से पांच-पांच लाख रुपये लिए गए हैं। इस संबंध में प्रबंधकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन से मुलाकात भी की। दो उड़नदस्तों की शिकायत की, इस पर कुलपति ने एक्शन लेने का भरोसा दिया है।
सीएसजेएमयू से संबद्ध स्व वित्तपोषित महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी, संयोजक डॉ. बृजेश भदौरिया, डॉ. मुकेश यादव, मुकेश भारती और रमाकांत तिवारी की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में एकजुट होने का आह्वान किया गया। प्रबंधकों ने कहा कि सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों के 200 करोड़ रुपये यूनिवर्सिटी के अकाउंट में पड़े हैं।
सेल्फ फाइनेंस कॉलेज बंद हुए तो अगले चार साल में यूनिवर्सिटी में ताला लग जाएगा। इसलिए डरने की जरूरत नहीं है। यूनिवर्सिटी की मनमानी और उड़नदस्तों की वजह से ही नकल बढ़ी है। एक शिक्षक खुद को यूनिवर्सिटी के अधिकारी का प्रतिनिधि बताकर छापेमारी कर रहे हैं।
एमजी कॉलेज उन्नाव के प्रबंधक अशोक पांडेय ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन की मिलीभगत से ही मास्टर (उड़नदस्ते) मनमानी वसूली कर रहे हैं। उन्होंने यूआईईटी के एक शिक्षक का नाम भी लिया। प्रबंधक ने कहा कि जिस दिन पेपर नहीं था, उस दिन भी शिक्षक छापा मारने पहुंच गए। 50 हजार रुपये घूस मांगी। नहीं दी तो गलत रिपोर्ट लगा दी है।
एक उड़नदस्ता पैसा लेते कैमरे में कैद है। इसके साक्ष्य राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और कुलपति को भी दिए गए हैं। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई है। यूनिवर्सिटी से 1000 कॉलेज संबद्ध हैं। 900 सेल्फ फाइनेंस कॉलेज हैं। सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों से जितनी अवैध उगाही होती है, उससे हर साल दो यूनिवर्सिटी बनाई जा सकती हैं।
रमाकांत ने कहा कि हर जिले का संगठन मजबूत बनाया जाए। निजी कॉलेज प्रबंधक अपना फंड बनाएं और हित की लड़ाई लड़ें। मीटिंग में कानपुर, औरैया, इटावा, फर्रुखाबाद, कानपुर देहात, फतेहपुर, उन्नाव, कौशांबी, इलाहाबाद, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, हरदोई और कन्नौज के प्रबंधकों ने हिस्सा लिया। पहली बार प्रबंधक एकजुट दिखे।