सर्दी के सितम से बचने के लिए भगवानों को लेना पड़ रहा गर्म कपड़ों का सहारा
- फोटो : गौरव शुक्ला
हाड़ंकंपाऊ ठंड से सब बेहाल हैं। सर्दी से बचने के लिए खुद भगवानों को गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है। गुरुवार को अचानक बढ़ी गलन से कानपुरवासियों के हाल बेहाल हो गए। घर से बाहर निकलने से पहले दस बार सोचना पड़ रहा है। उत्तराखंड की बर्फीली पहाड़ियों से होकर आने वाली पछुआ हवाओं ने गुरुवार को मैदानी क्षेत्रों में सर्दी बढ़ा दी। एक दिन में ही अधिकतम पारा लुढ़ककर सात डिग्री सेल्सियस नीचे आ गया। जो पारा बुधवार को 22.6 डिग्री था, वह गुरुवार को 15.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। अधिकतम पारे में यह अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले पांच डिग्री सेल्सियस गिरावट दर्ज की गई थी। पछुुआ हवाएं 5.9 किलो मीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलीं, इस वजह ठंड बढ़ गई। वातावरण में सुबह की नमी 100 फीसदी हो गई है।
हनुमान और शिव को भी लग रही ठंड
सर्दी के सितम से बचने के लिए भगवानों को लेना पड़ रहा गर्म कपड़ों का सहारा
सर्दी भगवानों को भी लग रही है। कानपुर के फैक्ट्री एरिया फजलगंज स्थित दुर्गा मंदिर में भगवान शिव और हनुमान गर्म कपड़े पहनकर भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। मंदिर के पुजारी का कहना है कि सर्दी से जिस तरह हम भक्त परेशान हैं,इससे बचने के तमाम तरीके अपना रहे हैं उसी तरह श्रद्धा के साथ अपने भगवानों को सर्दी से बचाने के लिए शॉल और कंबल मूर्तियों पर ओढ़ाये गये हैं। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि शुक्रवार को दोपहर तक धुंध छाए रहेगी। हल्की धूप की उम्मीद है लेकिन सर्दी से राहत नहीं मिलेगी। पारा और नीचे जा सकता है। जनवरी के पहले सप्ताह में अच्छी सर्दी पड़ने की उम्मीद की जा सकती है। दो जनवरी तक बारिश के आसार कम हैं।
चल रहीं सर्द हवायें
सर्दी के सितम से बचने के लिए भगवानों को लेना पड़ रहा गर्म कपड़ों का सहारा
पछुवा हवाएं चलने से दिन के अधिकतम तापमान में तीन डिग्री की गिरावट आ गई है। ठंड बढ़ने के साथ सारा दिन धुंध छाई रही और सूर्यदेव ने दिन भर दर्शन नहीं हुए। पिछले एक सप्ताह में गुरुवार सीजन का सबसे ठंडा दिन रहा। इस हाड़कंपाऊ ठंड से बचने के लिए लोग गर्म कपड़ों के साथ अलाव का सहारा लेते रहे।