‘मम्मी-पापा ये मत समझना कि मेरे ऊपर शनि है तभी ऐसा हुआ जबकि ऐसा नहीं है मैने जैसे कर्म किए वैसी सजा मिली पर तकलीफें हमेशा आप लोगों को मिलीं।’ इस सुसाइड नोट को लिखने के बाद कानपुर के जसवंत ने खुद को मौत के हवाले कर दिया।
मूलरूप से शेखपुर अरौल निवासी जसवंत कटियार (26) कल्याणपुर नौ नंबर क्रॉसिंग के पास अपने फूफा भारतेंदु प्रकाश कटियार के हॉस्टल में रहकर एक लेदर फैक्ट्री में काम करता था। गुरुवार सुबह 10 बजे तक जसवंत दूसरी मंजिल पर बने कमरे से नहीं उतरा तो भारतेंदु ने अपने पुत्र संयम को उसे देखने भेजा। कमरे में जसवंत का शव बुआ के दुपट्टे के सहारे पंखे से लटका देखकर संयम ने पिता को सूचना दी। पुलिस के पहुंचने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। जसवंत के पिता बलबीर सिंह कटियार रिटायर्ड शिक्षक हैं। वह पत्नी मांडवी और छोटे बेटे हेमंत के साथ अरौल में रहते हैं। बेटे की मौत की सूचना पर पिता भी मौके पहुंच गए। उन्होंने बताया कि बेटे को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी, जिसकी वजह से उसे आत्महत्या करनी पड़ी हो।