हम पुरातन पहचान के साथ आगे बढ़ रहे हैं
अब मथुरा की बारी है और हम फिर से अपनी पुरातन पहचान को बनाए रखने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। यह चित्रकूट धाम है। इसके साथ ही इस धरती को सौभाग्य है कि महर्षि बाल्मीकि की जन्मभूमि भी लालापुर में है। तुलसीदास जी की पावन धरती राजापुर, चित्रकूट में है संस्कृत का पहला मौलिक ग्रंथ त्रिकालदर्शी लिखा था।
खर-दूषण का हुआ है सफाया
उन्होंने आगे कहा कि मैं जब छह साल पहले चित्रकूट आया था, तो पूछा कि इतना पिछड़ा हुआ क्यों है... तो लोगों ने कहा कि छह बजे के बाद यहां शाम को लोग निकलते नहीं है। मैंने पूछा ऐसा कौन सा खर-दूषण आ गया है। हमारे नेताओं की सक्रियता से उनका भी सफाया हुआ है।
जहां संयम होगा, वहीं होगी साधना
सीएम योगी ने कहा कि चित्रकूट की भूमि संयम की धरती है, जहां संयम होगा वही साधना हो सकती है। प्रभु श्रीराम ने इसी चित्रकूट में 14 वर्ष के वनवास के सर्वाधिक समय साधना की थी। यहां लाखों की संख्या मे आने वाले श्रद्धालु मंदाकिनी में डुबकी लगाकर कामतानाथ की परिक्रमा करके धन्य होते हैं।
उत्तरप्रदेश में भी था पहचान का संकट
कुछ लोग अपने कृत्यों से पाप का घड़ा इतना भर लेते है कि स्वयं के लिए पहचान का संकट पैदा करते ही है। साथ ही समाज के लिए भी पहचान का संकट पैदा कर देते है। 2017 के पहले यही पहचान का संकट उत्तरप्रदेश में भी पैदा कर दिया गया था।
आजादी के अमृत वर्ष में देखें लीडरशिप
देश का लीडरशिप कैसे होना चाहिए उसको देखना हो, तो आजादी के अमृत वर्ष मे देखना चाहिए। प्रधानमंत्री जी ने हर घर तिरंगा अभियान चलाकर लोकतंत्र के पर्व का अहसास करवाया। कोरोना के समय प्रधानमंत्री जी अकेले निकलते थे, जीवन बचाने के लिए।