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सीएम जानते थे गड़बड़ी होगी

Wed, 13 Jan 2016 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
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मुख्यमंत्री को सपाइयों के उत्पात का अंदेशा पहले से ही था। तभी उन्होंने पुलिस लाइन हैलीपैड पर उतरते ही कहा कि ये लोग पैदल तो चलने नहीं देंगे और हुआ भी वही। मुख्यमंत्री पैदल आशा यात्रा में नहीं शामिल हो सके। हैलीपैड से मुख्यमंत्री की फ्लीट सीधे ग्रीनपार्क स्टेडियम पहुंच गई। इसके बाद जो उत्पात हुआ उसने शांति यात्रा को अशांति यात्रा में बदल दिया।
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मुख्यमंत्री का जो सरकारी कार्यक्रम जारी हुआ था, उसके मुताबिक उन्हें पुलिस लाइन से सीधे फूलबाग जाना था। इसके बाद पैदल यात्रा में शामिल होकर ग्रीनपार्क आना था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। फिर जिला प्रशासन ने तय किया कि पुलिस लाइन से ही मुख्यमंत्री को पैदल यात्रा कराते हुए कुछ दूर ले जाया जाएगा लेकिन अनियंत्रित सपाइयों के कारण अंतिम समय में पैदल यात्रा ही टाल दी गई।

इससे आशा यात्रा में शामिल लोगों को भी निराशा हुई। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर कहा कि सीएम पैदल चलते तो अव्यवस्था फैलती, इसलिए कार्यक्रम बदला गया।
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आशा यात्रा में शामिल हुजूम जैसे ही ग्रीन पार्क में घुसा, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी दफ्तर के सामने से लेकर डायरेक्टर पवेलियन तक भगदड़ मच गई। लोग आगे निकलने की होड़ में धक्का-मुक्की करने लगे। गैलरी में मख्यमंत्री की फ्लीट की गाड़ियां खड़ी थीं, लोग उन गाड़ियों से टकराते, नाली-जाली कूदते-फांदते गिरते रहे।

मुख्यमंत्री की वीवीआईपी सफारी गाड़ी को छूते-रहे और अफसर असहाय बने रहे। डायरेक्टर पवेलियन के गेट पर रस्सा बांधकर डीएम, एसएसपी कई एसीएम भीड़ को रोकते रहे, माइक से चीखते रहे लेकिन कोई रुकने को तैयार नहीं था। 

डायरेक्टर पवेलियन के सामने नीचे कई स्थानों पर पानी वाले पाइप पड़े थे। कई लोगों के पैर इसमें फंसे और गिर गए। शिवम रावत का एक तरफ का चेहरा छिल गया। राजू, सत्येंद्र, प्रेम किशोर, अकलेंद्र, परवीन, रजनी, मीनू, अलका, प्रेमवती नाली में पैर पड़ने से गिर गईं।

एक रेला आया और भीड़ सीएम की फ्लीट की गाड़ियों से टकराते हुए गेट की ओर बढ़ गई। गाड़ियों के बीच से निकल रहे कई लोग दब गए। कई एनजीओ की युवतियां, शिक्षिकाएं, छात्राएं भीड़ के बीच धक्का-मुक्की में फंसी रहीं, चीखती रहीं। लेकिन, इनकी सुनने वाला कोई नहीं था।
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