परिणाम आने के बाद उत्साहित ओजस्वित
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सोशल मीडिया से दूरी नहीं, अनुशासन जरूरी
आज के दौर में जहां अधिकांश छात्र मोबाइल और सोशल मीडिया को पढ़ाई में बाधा मानते हैं, वहीं ओजस्वित का नजरिया थोड़ा अलग है। उन्होंने बताया कि वह सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते थे, लेकिन इसे अपनी पढ़ाई पर कभी हावी नहीं होने दिया। ओजस्वित के अनुसार, "मैने सोशल मीडिया का उपयोग मनोरंजन और जानकारी के लिए किया, लेकिन मेरा एक सख्त नियम था— पढ़ाई के समय मोबाइल पूरी तरह बंद। जब मैं अपनी मेज पर पढ़ने बैठता था, तो दुनिया की किसी भी डिजिटल गतिविधि से मेरा संपर्क टूट जाता था। मोबाइल को स्विच ऑफ करके दूसरे कमरे में रख देना ही मेरी एकाग्रता का राज रहा।"
अपनी सफलता के बारे में बताते ओजस्वित
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रोजाना 7 से 8 घंटे की मेहनत
ओजस्वित की यह सफलता किसी शॉर्टकट से नहीं, बल्कि निरंतरता से आई है। उन्होंने साझा किया कि वह रोजाना
7 से 8 घंटे तक पढ़ाई करते थे। उनके अनुसार, परीक्षा के दिनों में पढ़ाई बढ़ा देने से बेहतर है कि साल के पहले दिन से ही एक तय शेड्यूल का पालन किया जाए। उन्होंने केवल किताबी ज्ञान पर ही नहीं, बल्कि कॉन्सेप्ट को समझने पर जोर दिया।
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रिजल्ट के बाद खुशी जाहिर करती छात्राएं
- फोटो : वीडिओ ग्रैब
बोर्ड के लिए स्कूल और घर पर ही की तैयारी
सबसे दिलचस्प बात यह है कि ओजस्वित ने बोर्ड परीक्षाओं के लिए किसी अलग से कोचिंग का सहारा नहीं लिया। उन्होंने बताया, "मैंने JEE के लिए कोचिंग ज्वाइन की थी ताकि मैं इंजीनियरिंग के अपने सपने को पूरा कर सकूं। लेकिन जहां तक बोर्ड परीक्षा का सवाल है, मैंने इसके लिए पूरी तरह से अपने स्कूल के शिक्षकों और घर पर सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया। स्कूल में जो पढ़ाया गया, उसे घर आकर दोहराना और पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों को हल करना ही मेरी रणनीति थी।"
इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बनाना चाहते हैं भविष्य
ओजस्वित अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शीलिंग हाउस स्कूल के शिक्षकों को देते हैं। वह आगे चलकर एक सफल इंजीनियर बनना चाहते हैं और देश की तकनीकी प्रगति में अपना योगदान देना चाहते हैं। उनकी इस उपलब्धि पर स्कूल की प्रधानाचार्या और शिक्षकों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।