मजबूर पिता अपने बीमार बेटे को अस्पताल गेट के बाहर ही लेटा कर डॉक्टरों के लगातार मिन्नतें करता रहा लेकिन कई घंटे बीत जाने के बाद भी किसी भी स्वास्थ्य कर्मी ने उसको अस्पताल में भर्ती करने की जहमत नहीं उठाई। तेज बुखार से तड़पता कल्लू अपनी मां के गोद में फर्श पर लेटा रहा और उसकी मां व पिता भर्ती करने के लिए डॉक्टरों के चक्कर काटते रहे। कई घंटे बीत जाने के बाद जब कुछ मीडिया कर्मियों ने उसका वीडियो बनाकर जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी से बात की।
इसके बाद आनन-फानन डॉक्टरों ने चार घंटे बाद उसका प्राथमिक उपचार करना शुरू कर दिया और कुछ ही घंटे बाद फिर से लिखित में उसको जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। ऐसे में स्वास्थ्य महकमे की बड़ी संवेदनहीनता सामने आई है। एक तरफ जहां शासन लोगों को मुफ्त में इलाज और दवा मुहैया कराने का दावा करता है वहीं यह मामला उन दावों की पोल खोलते हुए नजर आ रहा है।