बात चाहे ऐतिहासिक धरोवरों की हो या संस्कृति की, इनमें चित्रकूट जिले का अपना विशेष महत्व रहा है। लेकिन इस जिले को नताओंं ने खूब ठगा है। चित्रकूट के विकास के लिए चुनावी राग अलापने वाले राजनीतिक नेता हर बार आए और विकास के नाम पर खूब वादे किए लेकिन सब हवा में उड़ते रहे।
इसी का नतीजा है कि जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल सज-संवर नहीं सके। बुंदेलखंडी प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए अच्छा मंच भी नहीं मिल सका। जिले में पानी की भीषण समस्या आज भी जस की तस है। इस चुनाव में नेता फिर वादों के पिटारे खोलकर वोटरों को रिझा रहे हैं।
1973 में लोहिया ने रामायण मेले की कराई थी शुरुआत
विख्यात समाजसेवी डा. राममनोहर लोहिया ने 1973 में चित्रकूट में रामायण मेले की शुरुआत कराई थी। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई समेत कई केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल व प्रदेश के मुख्यमंत्री आते रहे। इन मौकों पर चित्रकूट व बुंदेलखंड के विकास व बुंदेलखंडी प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने पर खूब चर्चा होती रही, नतीजा आज भी शून्य है। न तो बुंदेली प्रतिभाओं को अच्छा मंच मिल सका, न ही समस्याओं का अंत हुआ। अभी तक 43 मेले हो चुके हैं।
भवन के लिए मिला था बजट
पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह की पहल पर रामायण मेले के भवन के लिए बजट मिला था। इसी भवन में रामायण मेला होता है।
रामायण मेला सर्किल की घोषणा भी हवा हुई
पिछले साल रामायण मेले का शुभारंभ करने के लिए केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा आए थे, जिन्होंने रामायण सर्किल बनाने की घोषणा की थी। इसका कार्य आज तक शुरू नहीं हो पाया है। कई बार यह चुनावी मुद्दा भी बना लेकिन समय के साथ नेता, प्रत्याशी इसे भूलते रहे। लोगों का मानना है कि रामायण मेले को राष्ट्रीय स्तर पर सही पहचान व मौके मिलें तो बुंदेलखंड की प्रतिभाएं आगे बढ़ेंगी, साथ ही रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।
गोस्वामी जी की जन्मस्थली भी बदहाल
राजनीतिक दलों ने महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती पर उनकी जन्मस्थली राजापुर में कई बार विकास का राग अलापा, लेकिन काम नहीं हुए। सपा सरकार में मानस भवन के सुंदरीकरण के लिए बजट दिया गया। इसका कार्य भी अभी पूरा नहीं हुआ है। इस क्षेत्र को प्रदेश सरकार ने तहसील घोषित किया, लेकिन विकास अधूरा है। यहां नहरों में पानी नहीं है। राजापुर तक बनने वाली सड़क अधूरी है।
मूर्ति पर नहीं लगी छतरी
जन्म स्थली पर लगी गोस्वामी तुुलसीदास की मूर्ति पर आज तक छतरी नहीं लग सकी है। इससे मूर्ति खराब हो रही है।