करोड़ों का माल डंप है गोदामों में, नुकसान की भरपाई के लिए परेशान
सोशल मीडिया पर चाइना उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम का सबसे अधिक असर इलेक्ट्रिक बाजार पर पड़ा। दीपावली बाद इसकी हकीकत सामने आई है। कानपुर में इलेक्ट्रिक आइटमों का थोक कारोबार इस मुहिम की भेंट चढ़ गया। त्योहार बीत जाने के बाद कारोबारियों के गोदामों में 50 फीसदी तक माल डंप पड़ा है। 80 फीसदी कारोबारी माल की कीमत तक नहीं निकाल पाए। थोक कारोबारी नुकसान की भरपाई के लिए परेशान हैं।
मनीराम बगिया स्थित थोक इलेक्ट्रिक बाजार यूपी के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक बाजारों में गिना जाता है। यहां 200 से अधिक बड़े कारोबारी हैं। इन्होंने दीपावली पर चाइना मेड सजावटी इलेक्ट्रिक आइटमों के लिए करीब एक हजार करोड़ रुपये के माल का आर्डर दिया था। त्योहार से एक माह पहले आ चुका माल दीपावली बीत जाने के बाद तक सिर्फ 50 फीसदी ही बिक सका। कुछ कारोबारियों का तो इससे अधिक माल गोदाम में डंप है। त्योहार बाद इसका आकलन किया गया तो नुकसान देखकर कारोबारी परेशान हैं। कारोबारियों ने अगले साल चीन उत्पादों का आर्डर नहीं देने का मन बनाया है। हालांकि कारोबारी इस घटनाक्रम से नाराज हैं कि बहिष्कार की बात सिर्फ इलेक्ट्रिक आइटमों के लिए ही कही जा रही है। शहर में चीन के मोबाइल फोन, कपड़े, मशीनरी तक बिक रही है।
कानपुर इलेक्ट्रिक कॉंट्रैक्टर्स एंड मर्चेट्स वेलफेयर एसोसिएशन अध्यक्ष राजीव मेहरोत्रा ने कहा कि इलेक्ट्रिक आइटम कारोबारियों की दीपावली अच्छी नहीं रही। एक-एक के पास करोड़ों रुपये का डंप पड़ा है। अगले साल तक आधा माल खराब हो जाएगा। माल को निकालना अब चुनौती है। नुकसान की भरपाई संभव नहीं है।
दोगुना हुई देशी प्रोडक्ट की मांग
चाइना प्रोडक्ट के खिलाफ मुहिम का असर ये रहा कि इलेक्ट्रिक बाजार में इस बार देशी उत्पादों की मांग दोगुना हो गई। पिछले वर्षों में देशी उत्पादों का कुल कारोबार करीब 200 करोड़ रुपये के आसपास रहा है। इस साल ये अनुमान के मुताबिक करीब 400 करोड़ रुपये का रहा। जिन कारोबारियों ने देशी आइटमों को तरजीह दी उन्होंने चाइना आइटम में हुए नुकसान की भरपाई कर ली। घरों ऑफिसों में इस बार देशी झालर, डिजाइन लाइट अधिक देखी गई।