शहर में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का खूनी खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासन की सख्ती और दावों के बावजूद यह जानलेवा धागा राहगीरों के लिए काल साबित हो रहा है। ताजा मामला थाना रेल बाजार क्षेत्र का है, जहां बुधवार देर शाम कोचिंग से घर लौट रहे 11वीं के एक छात्र के जबड़े में मांझा फंस गया। मांझे की धार इतनी तेज थी कि छात्र का चेहरा बुरी तरह कट गया और वह लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़ा। स्थानीय लोगों और दोस्तों की मदद से उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों को ऑपरेशन कर टांके लगाने पड़े।
खपरा मोहाल पुल पर हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, मीरपुर निवासी 17 वर्षीय रोहान पुत्र (अभिभावक का नाम) कक्षा 11 का छात्र है। बुधवार शाम करीब 7 बजे वह अपनी कोचिंग खत्म कर साइकिल/स्कूटी से घर वापस लौट रहा था। जैसे ही वह फेतफुल गंज चौकी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खपरा मोहाल पुल पर पहुंचा, तभी अचानक आसमान से लटकता हुआ चाइनीज मांझा उसके गले और जबड़े में आकर फंस गया। जब तक रोहान कुछ समझ पाता या खुद को संभाल पाता, मांझे ने उसके चेहरे को बुरी तरह चीर दिया।
दोस्तों ने दिखाई तत्परता, अस्पताल में भर्ती
हादसे के बाद रोहान दर्द से कराहते हुए बीच सड़क पर गिर गया। उसके साथ मौजूद दोस्तों ने हिम्मत दिखाई और आनन-फानन में घायल रोहान को पास के कृष्णा हॉस्पिटल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद परिजनों को सूचना दी गई। रोहान की गंभीर स्थिति को देखते हुए घरवाले उसे दूसरे बड़े अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने बताया कि घाव काफी गहरा है। देर रात डॉक्टरों की टीम ने रोहान के जबड़े का ऑपरेशन किया और कई टांके लगाए। फिलहाल छात्र की स्थिति स्थिर बनी हुई है, लेकिन वह अभी बोलने की स्थिति में नहीं है।
शहर में चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम बिक्री प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर रही है। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री ने अवैध चाइनीज मांझे की बिक्री और उपयोग पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर इन आदेशों का असर बेहद कमजोर दिखाई दे रहा है। लगातार हो रहे हादसे बता रहे हैं कि प्रतिबंध केवल कागजों तक सीमित है। स्थानीय लोगों ने अभियान चलाकर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन के दावों की खुली पोल
इस घटना ने एक बार फिर शहर में प्रतिबंधित सामग्री की धड़ल्ले से हो रही बिक्री पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। पुलिस और जिला प्रशासन समय-समय पर अभियान चलाकर चाइनीज मांझा न बेचने की चेतावनी देता है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। खपरा मोहाल और रेल बाजार जैसे घने इलाकों में पतंगबाजी के शौकीन अभी भी नायलॉन वाले इस घातक मांझे का उपयोग कर रहे हैं। क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि शाम के वक्त पुलों पर मांझा लटकना आम बात हो गई है। पुलिस की गश्त न होने के कारण पतंगबाज बेखौफ होकर इस जानलेवा धागे का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे मासूम बच्चों और राहगीरों की 'जिंदगी की डोर' पर खतरा मंडरा रहा है।