चेकअप तभी कराते हैं, जब मोबाइल दिया जाता है
इसके दुष्प्रभाव आने पर अस्पतालों में आ रहे हैं। अकादमी के जागरूकता कार्यक्रमों में बताया जा रहा है कि बच्चों को स्क्रीन से दूर रखें। दो साल की उम्र तक बच्चों को मोबाइल न देखने दें। स्क्रीन से वर्चुअल ऑटिज्म हो रहा है। इसमें बच्चा समझता हर बात है लेकिन घर के किसी शख्स के बुलाने पर रिस्पांस नहीं देता। अगर स्क्रीन पर बोले जाने वाले डायलॉग के अंदाज में बात करें तो तुरंत जवाब देता है। उन्होंने बताया कि अस्पतालों में आने वाले बच्चे ढंग से चेकअप तभी कराते हैं, जब उन्हें मोबाइल दिया जाता है।
आंखों और दिमाग पर हो रहा है दुष्प्रभाव
सेंट्रल साइकेट्रिक सोसाइटी के महासचिव वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. गणेश शंकर ने शोधों के हवाले से बताया कि बच्चों के मुंह में बोतल लगाकर हाथ में मोबाइल थमाने से बच्चों में खाने की आदतों और आत्म नियमन क्षमता प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि जब बच्चे का मिजाज असामान्य हो जाता है, तो मां-बाप विशेषज्ञ के यहां दिखाने आते हैं। मां-बाप के भी स्क्रीन एडिक्शन की गिरफ्त में होने से बच्चों की समस्या जटिल हो जाती है। स्क्रीन का अधिक दुष्प्रभाव रोगी की आंखों और दिमाग पर हो रहा है। माता-पिता थोड़ी सी राहत के लिए बच्चों को खतरे में डाल रहे हैं।
स्क्रीन एडिक्शन से ये दिक्कतें भी आ सकतीं
- बच्चे में भाषा का ढंग से विकास नहीं होगा।
- बच्चे को अलग-अलग खाने की पहचान, स्वाद पकड़ने में दिक्कत होगी।
- स्क्रीन देखते हुए खाने से बच्चा मोटापाग्रस्त हो सकता है।
- मानसिक सहन क्षमता कम होगी।
- नेत्र रोग हो सकते हैं, आंख की रोशनी प्रभावित होगी।
- घर वालों से भावनात्मक लगाव कम होगा।