बेमौसम फैल रहे स्वाइन फ्लू से बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा डायबिटीज, गुर्दे और लीवर रोगियों को अधिक खतरा है। ऐसे लोगों को स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
एसजीपीजीआई लखनऊ के क्रिटिकल केयर और इमरजेंसी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आरके सिंह ने कानपुर फिजिशियन एसोसिएशन (केएफए) के बैनर तले आयोजित सेमिनार में यह बात बताई। सेमिनार का आयोजन रविवार को मेडिकल कॉलेज के लेक्चर थिएटर-3 में किया गया।
डेमो पिक
उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू में सामान्य फ्लू के लक्षणों के साथ गैस्ट्रोइंटाइटिस, पेट रोग के लक्षण उभरते हैं। इनके आधार पर डायग्नोसिस तैयार करनी चाहिए। स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए जाने पर डॉक्टरों को इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। जांच रिपोर्ट का इंतजार करने से रोगी की हालत अधिक गंभीर हो सकती है।
अगर रोगी की तबियत अधिक बिगड़ी तो उसे बचाना मुश्किल हो सकता है। बताया कि सूअर के अंदर स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू और फ्लू के वायरस मिलकर एक नया स्ट्रेन तैयार कर ले रहे हैं। पहले यह वायरस सूअर से आदमी में आता है, फिर आदमी से दूसरे आदमी में फैलने लगता है।
उन्होंने डॉक्टरों को स्वाइन फ्लू की वैक्सीन के संबंध में भी जानकारी दी। मौके पर मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी, केएफए के अध्यक्ष डॉ. डीके सिन्हा, सचिव डॉ. कुणाल सहाय, डॉ. प्रेम सिंह, डॉ. अरविंद कुमार आदि मौजूद रहे।