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विवाह ऐसा भी : न सिंदूर न फेरे…फिर भी 51000 मेरे, जोड़ों ने सिर्फ जयमाला पहनी और नहीं कीं रस्में, पढ़ें मामला

Sun, 15 Dec 2024 01:41 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह में आर्थिक मदद और उपहार के लालच में कई जोड़ों ने सिर्फ जयमाला पहनी और रस्में तक नहीं अदा कीं। परिजन बोले कि सहालग में घर पर शादी समारोह का आयोजन कर बिटिया को ससुराल भेजेंगे।
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मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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केस वन

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सरसौल के रामनगर में रहने वाली शालू का विवाह राजेश के साथ हुआ। सामूहिक विवाह में वधू ने मांग भराई की रस्म अदा नहीं की और न ही फेरे लिए। परिजनों ने बताया कि मार्च में विधिवत विवाह समारोह का आयोजन करेंगे।

केस दो
भीतरगांव के बृजेश कुमार का विवाह वंदना के साथ होना था। वंदना मंडप के नीचे बैठीं लेकिन सिंदूर भरने की रस्म नहीं पूरी की। परिजनों ने कहा कि मार्च में शादी है, तभी ससुराल के लिए विदा करेंगे। अभी वह मायके जाएगी।
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केस तीन
रसूलपुर की रहने वाले अरुण कुमार का विवाह रिया से होना था। मंडप के नीचे पूजा पाठ की लेकिन मांग भरने और फेरे लेने की रस्म पूरी नहीं की। वधू उपहार लेकर अपने पति के साथ ससुराल न जाकर मायके वापस लौट गई।

केस चार
शिवराजपुर ब्लॉक के महाराजनगर की रहने वाले काजल का विवाह विनय कुमार के साथ हुआ। इन्होंने मंडप के नीचे बैठकर सभी रस्म अदा की लेकिन वह परिजनों के साथ मायके चली गईं। उन्होंने बताया कि विनय बाद में बरात लेकर आएंगे।

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कानपुर में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत जिले में शनिवार को छह ब्लॉकों में आयोजन हुए। दो ब्लॉकों में कई वर-वधुओं ने मंडप के नीचे बैठ पूजा-अर्चना तो की पर वधुओं ने न तो मांग में सिंदूर भरा और न ही जोड़ों ने फेरे लिए। इसके बाद वधुएं ससुराल की जगह मायके लौट गईं। अधिकतर परिजनों ने बताया कि सहालग में विधिवत शादी कराएंगे। फिर बिटिया को ससुराल भेजेंगे।
योजना के तहत एक जोड़े को कुल 51 हजार रुपये दिए जाते हैं। इसमें 35 हजार रुपये वधू के खाते में, 10 हजार रुपये के उपहार और बाकी धनराशि खाने समेत अन्य कार्यों में खर्च की जाती है। इसी आर्थिक मदद और उपहारों के लिए वर-वधुओं ने वरमाला पहनाकर दिखावे की शादी की। शनिवार को शिवराजपुर और नर्वल तहसील में हुए सामूहिक विवाह में पंडितों ने वर-वधुओं से फेरे लेने का आह्वान करते हुए मंत्रोच्चारण शुरू किया,तो कई जोड़े फेरे लेने के बजाय वहीं खड़े हो गए।

रिश्तेदारों की मौजूदगी में करेंगे शादी का आयोजन
कई वधुओं ने तो मांग में सिंदूर भी नहीं भरवाया। सिर्फ माथे पर सिंदूर लगा लिया था। जब उपहार लेने का समय आया तो ये सभी लाइन में खड़े होकर सरकार का उपहार ले गए। अधिकतर जोड़ों के परिजनों का कहना था कि हम आर्थिक तौर पर कमजोर हैं। इसीलिए यहां आए हैं। यहां उपहार मिल गए और मदद की राशि खाते में आएगी, अब सहालग में रिश्तेदारों की मौजूदगी में शादी समारोह का आयोजन कर बेटी को विदा करेंगे।

सरकारी मंडप में अव्यवस्थाओं की बरात
योजना के तहत सजाए गए मंडप में अव्यवस्थाएं हावी रहीं। समारोह में आए वर-वधू और उनके परिजनों के लिए भोजन-पानी तक का जिम्मेदार मुकम्मल इंतजाम नहीं कर सके। शिवराजपुर ब्लॉक में हुए आयोजन में कैंपर में पानी था पर गिलास कम पड़ गए। सुबह लंच के पैकेट कम दिए गए तो परिजनों ने हंगामा किया। नर्वल तहसील में हुए समारोह में खाने के लिए टोकन की व्यवस्था की गई। वर और वधू पक्ष के छह-छह लोगों के लिए सिर्फ खाने की व्यवस्था थी।
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जांच में पायल में मानक से कम मिली चांदी
बिल्हौर। नव विवाहिताओं को चांदी के जेवर दिए गए। इनकी गुणवत्ता परखने के लिए बीडीओ ने शादी समारोह के दौरान ही पहले एक सुनार को मौके पर बुलाकर पायल की तौल कराई जो 29 ग्राम की निकली। जब इसकी गुणवत्ता की जांच कराई गई तो इसमें 50 फीसदी चांदी निकली जबकि सरकारी मानकों के अनुसार 70 फीसदी चांदी होनी चाहिए और 30 ग्राम वजन होना चाहिए। अधिकारियों ने समझा बुझाकर दंपती को घर भेजा।
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