छठ पूजा के दूसरे दिन शनिवार को व्रत रखने वाली महिलाओं ने खरना पूजा की। सुबह स्नान के बाद दीप, धूप और फूल चढ़ाकर आराध्य देव का पूजन किया। शाम को स्नान ध्यान के बाद सुन लीं अरजिया हमार छठ मइया....गीत गाते हुए महिलाएं नंगे पैर घाट पहुंचीं। घाट में वेदी (सिप-सोप्ता) पर फूल चढ़ाकर रविवार की शाम अस्तागचल सूर्य को अर्घ्य देने के लिए स्थान पक्का किया। इसके बाद घर पहुंचकर चूल्हे में गुड़, साठिया चावल, गन्ने के रस में बनी खीर बनाकर उसका प्रसाद ग्रहण किया। इसके साथ ही उनका निर्जला व्रत शुरू हो गया। रात में पूजा के लिए देसी घी के पुए, ठेकुआ, पूड़ी और अन्य सामग्री तैयार की। वहीं शनिवार की शाम विजय नगर, शास्त्री नगर, सीटीआई नहर, बर्रा आदि बाजारों में खरीदारी के लिए खासी भीड़ उमड़ी।
पूजा की सामग्री
कच्ची अदरक, खड़ी हल्दी, आंवला, गाजर, कच्चा पपीता, शलजम, घुइयां, सुतनी, जिमीकंद, कद्दू, बंडा, सूरन, मूली, कैथा, शकरकंद, कच्ची इमली, अमरख, सरदा, गागल, मूंगफली, सेब, केला, अमरूद, शरीफा, जड़ वाला नारियल, पानी वाला नारियल, गन्ना, देसी घी, साठिया चावल, चूड़ा, साठिया चूड़ा, खोया, बेसन की मिठाई, चावल के लड्डू, नई साड़ी, पीला व लाल सिंदूर, रोली, सुपाड़ी, चूड़ियां, पीला धागा, सुहाग का सामान, शक्कर- - गुड़ व घी से बने मीठे ठेकुआ, बांस के सूप व डलिया, डलवा, कोसी।
इन घाटों पर होगी पूजा
अर्मापुर नहर, पनकी नहर, लाजपत नगर, शास्त्री नगर नहर, साकेतनगर नहर, बर्रा, मेहरबान सिंह पुरवा, गुजैनी, बर्रा, कल्याणपुर नहर।
महिलाएं सावधानी बरतें
- महिलाएं पूजा के दौरान घाट पर लगी बैरिकेडिंग से आगे न जाएं।
- पूजा के दौरान किसी अजनबी को सामान न दें, परिवार के साथ रहें।
- सोमवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तड़के परिवार के साथ घाट जाएं।