गिरोह के तस्कर नई दिल्ली से सिरप की बड़ी खेप लाने के बाद उसके मूल रैपर बदल देते थे और फर्जी दस्तावेज तैयार कर इसे सामान्य मेडिकल स्टोर की सप्लाई दिखाते थे, जबकि असल में इसे नशे के सौदागरों तक पहुंचाया जाता था।
रैपर बदलकर नशे के कारोबारियों तक पहुंचाते थे
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि नई दिल्ली से लाई गई कोडीनयुक्त सिरप की खेप को अतर्रा, बांदा, चित्रकूट और मध्य प्रदेश के आसपास के जिलों में नशे के कारोबारियों तक पहुंचाया जाता था। मेडिकल स्टोर में बिक्री के बजाय सिरप को नशे के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इसके लिए रैपर बदलने के साथ ही कूटरचित दस्तावेज तैयार किए जाते थे, ताकि परिवहन और सप्लाई संदिग्ध न लगे।
डीसीएम के आगे-आगे चलती थी एस्कॉर्ट कार
तस्करी के दौरान सिरप से लदी डीसीएम अकेले नहीं चलती थी। उसके आगे एक कार एस्कॉर्ट के रूप में चलती थी। पुलिस ने डीसीएम के साथ इस कार को भी बरामद किया है। कार में सवार तीन आरोपी डीसीएम के रास्ते और खेप की निगरानी करते थे। पूछताछ में पुलिस को तस्करी के नेटवर्क में इस व्यवस्था के इस्तेमाल की जानकारी मिली है।
खेप पहुंचाने के मिलते थे 25 हजार
पुलिस के मुताबिक डीसीएम चालक शेखर को खेप को सकुशल गंतव्य तक पहुंचाने के लिए 25 हजार रुपये अलग से दिए जाते थे। गिरफ्तार धीरेंद्र, प्रवीण उर्फ लकी और रोहित ने चालक को यह रकम दिए जाने की बात बताई है। इससे खेप पहुंचाने के लिए अलग-अलग लोगों की भूमिका तय होने की जानकारी सामने आई है।
सप्लायर-रिसीवर तक पहुंचेगी जांच
पूछताछ में अतर्रा के कुशवाहा मैरिज हाल के पास रहने वाले प्रियांशू उर्फ किशन का नाम सामने आया है। पुलिस के अनुसार उसी ने खेप मंगाई थी। वह अभी पुलिस के हाथ नहीं आया है। उसकी तलाश की जा रही है। वहीं एसटीएफ और पुलिस सप्लायर और रिसीवर का पता लगाने में जुटी हैं। पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
औषधि निरीक्षक ने लिया सिरप का नमूना
बरामद 250 पेटियों में 100-100 एमएल की 30 हजार शीशियां मिली हैं। औषधि निरीक्षक दिव्य प्रकाश मौर्य ने सिरप के नमूने लिए हैं। पुलिस ने दोनों वाहनों को सीज कर दिया है। मामले में आगे की जांच के साथ सिरप की आपूर्ति से जुड़े पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।