जिला सत्र न्यायालय माती का चेंबर विवाद का मसला सुलझता नजर नहीं आ रहा
है। इधर, सोमवार को सुनवाई के लिए आए वादकारियों को लौटना पड़ा। आक्रोशित
अधिवक्ताओं ने उन्हें कार्य बहिष्कार में सहयोग करने की बात कह अंदर घुसने
नहीं दिया। जिसके चलते वादकारियों को भी परेशानी से जूझना पड़ रहा है।
बताते
चलें कि जिला सत्र न्यायालय परिसर में लगभग 10 दिन पूर्व चेंबर विवाद का
चिंगारी सुलगनी शुरू हो गई थी। यह विवाद उस समय सुर्खियों में आ गया जब
परिसर में गंदगी फैलाने का आरोप अधिवक्ताओं पर लगा दिया और उन्हें कोर्ट से
बाहर बस्ता लगाने के लिए कह दिया गया।
इसी बात से नाराज अधिवक्ताओं ने
कार्य बहिष्कार की घोषणा कर दी। पहले दिन अधिवक्ता कोर्ट परिसर में ही
नारेबाजी कर विरोध जताते रहे। इसके बाद परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर
दिया। जब मामला न सुलझा तो अधिवक्ताओं ने कचहरी परिसर के अंदर वादकारियों
के घुसने पर रोक लगा दी।
वादकारियों को सुनवाई में जाने से रोकने पर मामला
तूल पकड़ गया और अधिवक्ताओं की मांगों को समर्थन मिलना शुरू हो गया। सोमवार
को भी अधिवक्ताओं ने अपने चिर-परिचित अंदाज में वादकारियों को अंदर घुसने
नहीं दिया।
संयुक्त संघर्ष समिति के अधिवक्ता अरंविद सिंह यादव,
शैलेंद्र तिवारी, राधेश्याम कटियार, हरीचरण कुशवाहा, विशाल सचान आदि ने
बताया कि उनके साथ गैरों जैसा बर्ताव किया जा रहा है।
बैठने के लिए चेंबर
तक नहीं हैं। इससे वादकारियों की समस्या सुनने में असुविधा हो रही है।
शीघ्र चेंबर का विवाद न सुलझा तो विरोध, प्रदर्शन और प्रबल होगा। सोमवार को
धरना-प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ता वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक संखवार, विशाल
सचान, सुबोध नारायण त्रिपाठी, चौधरी संग्राम सिंह, सुखदेव त्रिपाठी, रघुराज
सिंह, ओमकार सिंह, आनंद परमार, आशीष तिवारी, केपी सिंह, लाल मोहम्मद,
मुबारक अली, राममूरत, अनिल कुमार पांडेय, रमेश कुमार पांडेय, अखिलेश
शुक्ला, नरेश सिंह, रघुनंदन सिंह, सुंदरलाल सचान, राजेंद्र प्रसाद, मुलायम
सिंह, सुरेश सिंह, रवीकांत, राधेश्याम गुप्ता, शशिभूषण सिंह, आदित्य
पांडेय, अभय यादव, राजेंद्र प्रसाद, अविनाश, अवधेश शुक्ला, सुमित नारायण,
वीरेंद्र पाल, रमेशचंद्र गौर, रामजी कटियार आदि मौजूद रहे।