इटावा/चकरनगर। कोटा बैराज बांध से छोड़े गए तीन लाख क्यूसेक पानी से रविवार भोर चंबल नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया। तेजी से बढ़ते जलस्तर की रफ्तार इसके बाद भी कम नहीं हुई शाम होते होते चंबल का जलस्तर 123.13 मीटर पर पहुंच गया। जो खतरे के निशान 120.80 से 2.33 मीटर ऊपर है।
रातों रात बढ़े जलस्तर से चंबल के आसपास के सिद्ध नाथ मंदिर, भारेश्वर महादेव मंदिर, चकरपुरा के रास्ते में पानी भर गया। चंबल नदी में आई बाढ़ से आसपास के 42 गांवों को खतरा बढ़ गया है। इसको लेकर प्रशासन भी चिंतित है। तेजी से बढ़ रहे पानी की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने गोहानी गांव पहुंचकर ग्रामीणों से बात की और बताया कि ऊपरी क्षेत्र में पानी घटना शुरू हो गया है इससे वह सब घबराएं नहीं।
चंबल नदी में 24 घंटे के ही अंदर आई बाढ़ से से चकरनगर के भरेह, चकरपुरा, हरौली बहादुरपुर, नीमाडाड़ा, रानियां, ककरैया, खिरीटी, नीमरी कर्यावली, भजन पुरा सहित दो दर्जन से अधिक गांव के लोगों की नींद उड़ी हुई है। जहां एक दिन पूर्व शनिवार को शाम पांच बजे चंबल का जलस्तर 112.16 मीटर था तो वहीं रात में 76 सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से जलस्तर रविवार सुबह पांच बजे 120.95 मीटर पर पहुंच गया। दोपहर होते होते चंबल और उफान मारने लगी और 12 बजे जलस्तर 122.85 मीटर हो गया।
हालांकि इसके बाद जलस्तर बढ़ने की रफ्तार में कमी आई और शाम पांच बजे तक पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चंबल में पानी का जलस्तर बढ़कर 123.13 मीटर पर पहुंच गया। अगर इसी तरह चंबल में पानी और बढ़ा तो तलहटी के गांव एक बार फिर से बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे। एक माह पूर्व चंबल का जलस्तर बढ़कर 127.06 मीटर पर पहुंच गया था, जिससे कई गांवों में लोगों के घर पानी में डूब गए थे। इससे अभी लोग संभल नहीं पाए हैं और एक बार फिर से बाढ़ के मुहाने पर खड़े हैं। इससे लोगों के दिलों की धड़कने बढ़ी हुई हैं।
वहीं रविवार को डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ल एसडीएम ब्रह्मानंद कठेरिया और तहसीलदार विष्णु दत्त मिश्रा के साथ गोहानी गांव पहुंचे और लोगों को समझाया कि आज रात से चंबल का जलस्तर गिरना शुरू हो जाएगा। इसलिए उन्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने एसडीएम से बाढ़ को लेकर की गई तैयारी की जानकारी ली और 24 घंटे बाढ़ चौकियों को एलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन चंबल के बढ़ते जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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भरेह क्षेत्र में चरवाहों ने बीहड़ में जाना किया बंद, मवेशियों के लिए है चारे का संकट
चकरनगर। चंबल नदी में आए उफान के बाद चरवाहों ने मवेशियों के साथ बीहड़ में जाना बंद कर दिया है। पिछले माह आई बाढ़ में कछार और तराई में बाजरा और तिल की फसलें नष्ट हो गई थीं। भूसे के कूप उफान के पानी में बह गए थे। ग्रामीणों ने बताया कि फिर से उफनाई चंबल की वजह से मवेशियों के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में लोग मवेशियों को बीहड़ में चराने के लिए ले जाने लगे थे। खारों में फिर से चंबल का पानी आ गया है जिससे मवेशियों को व चराने नहीं ले जा पा रहे हैं।
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घड़ियाल, मगरमच्छों ने पकड़ा नदी का किनारा, खादर में आने का अंदेशा
चकरनगर। चंबल में एक बार फिर से बाढ़ जैसे हालात बनने से घड़ियाल, मगरमच्छ आदि जलीय जीवों ने नदी का किनारा पकड़ लिया है। ऐसे में चंबल का पानी खारों तक पहुंचने लगा है जिससे मगर और घडियालों का भी खारों में आने की आशंका बनी हुई है। चंबल नदी के उफान से घिरने वाले गांवों भरेह, चकरपुरा, नीमरी, कार्यावली, भजनपुरा, यमुना नदी से हरौली बहादुरपुर, नीमाडाड़ा, निभी, खिरीटी, ककरैया, रानियां के नजदीक तक मगरमच्छ के पहंचने का खतरा बढ़ गया है। चकनगर के रेंजर कोटेज त्यागी ने बताया कि गांव के नजदीक या बीहड़ के खादर में घड़ियाल, मगरमच्छ या उनके बच्चे दिखने पर वन विभाग को इसकी तुरंत सूचना दें।
फोटो 20::: भारेश्वर महादेव मंदिर के रास्ते पर पहुंचा चंबल का पानी। संवाद