फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुलिस के लिए चुनौती...आधार कार्ड वाले रोहिंग्या कहां और कितने, खुलासे के बाद मचा हड़कंप

Fri, 04 Dec 2020 12:00 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
फर्जी दस्तावेज तैयार कर आधार कार्ड बनाने के फर्जीवाड़े में पकड़े गए आरोपी शैलेंद्र साहू ने बड़ा खुलासा किया है। रोहिंग्याओं के भी फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर आधार कार्ड बनाए जाने का खुलासा किया तो पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। अब पुलिस के लिए यह पता करना चुनौती है कि आधार कार्ड वाले कितने रोहिंग्या हैं, इस समय कहां हैं और क्या कर रहे हैं? आरोपी के पास इनके संबंध में कोई ब्योरा उपलब्ध नहीं है।
विज्ञापन


ऐसे में पुलिस अफसर भी परेशान हैं। आरोपियों ने एक-एक शख्स के नाम पर कई-कई आधार कार्ड भी बनाए। इनमें पते अलग-अलग दिखाए गए। एसपी पूर्वी राजकुमार अग्रवाल के मुताबिक आरोपी शैलेंद्र साहू ने बताया कि वह सुनील के साथ मिलकर एक साल से यह फर्जीवाड़ा कर रहा है। दो सौ रुपये से लेकर हजार रुपये तक एक-एक आधार कार्ड के वसूलते थे। अब तक हजार से अधिक आधार कार्ड बना चुके हैं। वहीं जन्म, निवास प्रमाण पत्रों की संख्या इतनी अधिक है कि वो बता नहीं पाया।
विज्ञापन

खुफिया के अफसर अलर्ट
इस गिरोह के पर्दाफाश होने के बाद पुलिस के इनपुट पर खुफिया विभाग के अफसर भी अलर्ट हो गए हैं। कूड़ा बीनने वालों की बस्तियों व फुटपाथ पर रहने वालों के बारे में जानकारी जुटाने का काम शुरू कर दिया है। अधिकतर यहीं पर ये लोग रहते हैं। फिलहाल आरोपियों के पास इनकी पहचान संबंधी कोई जानकारी नहीं है। पुलिस के मुताबिक कुछ मोबाइल नंबर मिले हैं। जिनके आधार पर तहकीकात की जा रही है।

आयुष्मान योजना के कार्ड भी बनाते थे
एसपी ने बताया कि पहचान, निवास, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों के अलावा आरोपी आयुष्मान योजना कार्ड भी बनाते थे। इससे संबंधित ऑनलाइन वेबसाइट की भी आईडी व पासवर्ड आरोपी के पास से मिला है। इससे पुलिस को आशंका है कि गिरोह में कई और लोग भी शामिल हैं। 

स्नातक पास है आरोपी 
पुलिस के मुताबिक शैलेंद्र स्नातक पास है। उसने कंप्यूटर के कई अलग-अलग डिप्लोमा भी किए हुए हैं। वो कंप्यूटर में एक्सपर्ट है। इसलिए मुख्य खेल यही करता था। पुलिस को इसमें कॉलेज और कुछ इंडस्ट्री के नाम से मुहर भी मिली है। इसका सत्यापन करवाकर पुलिस कनेक्शन तलाश रही है कि आखिर ये मुहर आरोपी के पास क्यों हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें